आदिवासी क्षेत्र में नवजात बच्चे की खरीद-फरोख्त का सनसनीखेज मामला, मुख्य आरोपी और भाभी पर गिरफ्तारी वारंट जारी
उदयपुर के आदिवासी क्षेत्र में नवजात बच्चे की खरीद-फरोख्त का सनसनीखेज मामला सामने आया। कुंवारी मां से बच्चा छीनने, आरोपी सरदीराम और भाभी सुमी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी, पुलिस ने बच्चे को बाल गृह में रखा। मामला सामाजिक और कानूनी गंभीरता को उजागर करता है।

उदयपुर। आदिवासी बहुल क्षेत्र में नवजात बच्चे की खरीद-फरोख्त का मामला लगातार उलझता जा रहा है। आंध्र प्रदेश से बरामद नवजात बच्चे की असली पहचान और उसे किससे खरीदा गया, यह अभी तक पुलिस के लिए रहस्य बना हुआ है। वहीं, कुंवारी मां की गोद से नवजात को जबरन छीनने के आरोप में मुख्य आरोपी और उसकी भाभी के खिलाफ बुधवार को अदालत ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया। जिला पुलिस अधीक्षक ने इन दोनों आरोपियों के खिलाफ ईनामी राशि की भी घोषणा की है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, डिप्टी डूंगरसिंह चुण्डावत ने बताया कि 15 वर्षीय किशोरी को जंगल में लकड़ी बीनते समय चाकू दिखाकर दो बार दुष्कर्म कर उसके साथ गम्भीर अपराध किया गया और उसे कुंवारी मां बनाया गया। पीड़िता ने 28 जून को माण्डवा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी, लेकिन तत्कालीन थानाधिकारी ने मामले को जाति-पंचायत में निपटाने की सलाह दी और कोई कार्रवाई नहीं की।
पीड़िता के पिता ने अपनी पुत्री की सुरक्षा के लिए गुजरात ले जाकर 11 अगस्त, 2025 को डिलीवरी कराई और बाद में दोनों को गांव वापस लाया। इसके कुछ दिनों बाद, 13 अगस्त को आरोपी मुकेश, उसकी पत्नी सुमी और काका बकिया ने लाठी-डंडों से लैस होकर पीड़िता की गोद से नवजात को जबरन छीन लिया और मुकेश ने बच्चे को गुजरात में दलपत भाई को 1.5 लाख रुपये में बेच दिया। इसके बाद दलपत ने महाराष्ट्र के शीतल राहुल काकड़े को 2.3 लाख रुपये में और शीतल ने डॉ. सचिन देव लोखंडे को 2.7 लाख रुपये में बेचा।
इस अपराध की जटिल कड़ी में आंध्र प्रदेश के जैन परिवार को हिरासत में लिया गया और 4.7 लाख रुपये में खरीदा गया बच्चा जब्त किया गया। जब पुलिस ने बच्चे को पीड़िता के पास पहुंचाया, तो किशोरी की मां ने दावा किया कि यह नवजात उसका बच्चा नहीं है क्योंकि जन्म के समय उसने नाभि पर जलती हुई बीड़ी के दो डाम चिपका दिए थे। इस रहस्यपूर्ण स्थिति में पुलिस ने बच्चे को सीधे सीडब्ल्यूसी के माध्यम से बाल गृह में रखवाया।
बुधवार को पोक्सो-1 कोर्ट में प्रस्तुत प्रार्थना पत्र के बाद अदालत ने झांझर माण्डवा निवासी सरदीराम बुमड़िया और उसकी भाभी सुमी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया। अनुसंधान अधिकारी ने ग्राम पंचायत कोदरमाण, पंचायत समिति कोटड़ा के सरपंच को भी पत्र सौंपा, जिसमें बताया गया कि आरोपी अपने गांव छोड़कर अन्यत्र भाग गए हैं। पुलिस का मानना है कि इन दोनों की गिरफ्तारी से ही यह पता चल सकेगा कि बच्चा किसे बेचा गया और वर्तमान में वह कहां पर है।
यह मामला आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों की खरीद-फरोख्त और महिलाओं के साथ अपराध की गंभीरता को उजागर करता है। प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई से ही भविष्य में ऐसे अपराधों पर काबू पाया जा सकेगा।
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Pratahkal Bureau
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