उदयपुर। शहर में स्कूली वाहनों पर आरटीओ और पुलिस की चालान कार्रवाई के विरोध में ऑटो और वैन चालक सोमवार को कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन करते नजर आए। यूनियन के प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपकर 31 दिसंबर तक कार्रवाई के लिए समय देने की मांग की।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि बिना तैयारी के कार्रवाई करने से बड़ी संख्या में वाहन सड़क से बाहर हो रहे हैं, जिससे स्कूली बच्चों के आने-जाने में गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। इस दौरान इंडियन ऑटो रिक्शा चालक यूनियन, एकता ऑटो यूनियन, लेकसिटी ऑटो चालक यूनियन और बाल वाहिनी संघर्ष समिति के सदस्य शामिल थे।

स्कूल ऑटो और वैन ड्राइवर्स का आरोप है कि नियमों की नई व्याख्या अचानक लागू की जा रही है, जिसके तहत कम बच्चों के बावजूद चालान काटे जा रहे हैं। चालक इस समय पहले से ही बढ़ती ईंधन दर, अन्य खर्चों और स्कूलों से निर्धारित कम किराए के कारण आर्थिक दबाव में हैं। उनका कहना है कि अचानक चालान से उनकी आय पर प्रतिकूल असर पड़ा है।

यूनियन के प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलक्टर से आग्रह किया कि जिन नियमों के पालन के लिए नए उपकरण जैसे फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशमन यंत्र और वाहनों पर पीली पट्टी लगाना आवश्यक है, उनके लिए पर्याप्त समय दिया जाए। चालक दावा करते हैं कि ऑटो में छह और वैन में 10 से 12 बच्चों के अनुसार ही सेवा दी जा रही है और वैन की छत पर स्टैंड लगाकर बच्चों के बैग व्यवस्थित किए जाते हैं, बावजूद इसके चालान काटे जा रहे हैं।

वाहन मालिक हर वर्ष एसआरटी शुल्क भी जमा करते हैं, लेकिन प्रशासन द्वारा इस बार अचानक सख्ती बरती जा रही है। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि इससे पहले कभी ऐसी सख्ती नहीं की गई और किसी प्रकार की पूर्व सूचना या चेतावनी भी नहीं दी गई।

इस अवसर पर मोहम्मद सईद सक्का, अय्यूब खान, मोहम्मद रफीक शाह, मोहम्मद हनीफ इंदौरी, शेर खान, दिनेश सिंह जादौन, भगवती लाल साहू और हेमराज कुमावत सहित कई अन्य लोग मौजूद थे।

प्रदर्शन ने शहर में स्कूली वाहनों की सुरक्षा और नियमों के लागू होने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं, जिससे प्रशासन और यूनियन के बीच संभावित संवाद की जरूरत स्पष्ट हुई है।

Pratahkal Bureau

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