योजना कर्मियों का जिला कलेक्ट्री पर जोरदार धरना प्रदर्शन, नियमितीकरण और न्यूनतम मजदूरी की मांग
डूंगरपुर में आंगनबाड़ी, आशा और मिड-डे-मील कर्मियों ने जिला कलेक्ट्री पर धरना प्रदर्शन किया। नियमितीकरण, न्यूनतम मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा पेंशन की लंबित मांगों को लेकर संयुक्त मोर्चा ने सरकार को चेतावनी दी, और बजट 2026-27 में कार्रवाई की मांग की।

डूंगरपुर। जिले की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा सहयोगिनी, मिड-डे-मील वर्कर और राजीविका कार्यकर्ताओं ने अपनी लंबित मांगों को लेकर 9 दिसंबर को जिला कलेक्ट्री पर संयुक्त रूप से धरना प्रदर्शन किया। यह विरोध प्रदर्शन सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन और विभिन्न राष्ट्रीय फेडरेशन के संयुक्त आह्वान पर आयोजित किया गया।
यूनियन के प्रतिनिधियों ने बताया कि आंगनबाड़ी, आशा, कुक-कम-हेल्पर सहित योजना कर्मी पिछले कई वर्षों से प्रतिदिन 8 से 12 घंटे मेहनत कर रहे हैं, लेकिन सरकार उन्हें कर्मचारी नहीं मानकर स्वयं सेवक का दर्जा देती है। इसके कारण उनकी आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ रहा है। देशभर में 27 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और 10 लाख आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय 2018 के बाद से बढ़ाया नहीं गया है।
मध्याह्न भोजन तैयार करने वाले कर्मियों को 2009 में यूनियन के संघर्ष के बाद केवल मामूली वृद्धि मिली थी, जो वर्तमान में 2,000 रुपये प्रति माह, साल में केवल 10 महीनों के लिए ही उपलब्ध है। अन्य किसी भी सुविधा की बात छोड़ दें, उनके पास सेवा नियम नहीं हैं और सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी बुनियादी सुविधाएँ भी नहीं मिलती। आशा कार्यकर्ता और कुक-कम-हेल्पर श्रमिक मातृत्व लाभ के हकदार हैं, लेकिन सरकार स्कीम वर्कर्स के नियमितीकरण, न्यूनतम मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लिए 45वें और 46वें भारतीय श्रम सम्मेलनों की सर्वसम्मत सिफारिशें लागू करने के प्रति तैयार नहीं है। यूनियन ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने इस संबंध में इंडस्ट्रियल लॉजिकल कमेटी (ILC) बुलाना भी बंद कर दिया है।
संयुक्त मोर्चा ने चेतावनी दी है कि यदि बजट 2026-27 में उनकी नियमितीकरण, न्यूनतम मजदूरी और पेंशन के हक को सुनिश्चित नहीं किया गया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा और आम जनता को साथ लेकर संघर्ष को तेज किया जाएगा। इस मौके पर 12 सूत्रीय मांगों के समर्थन में धरना प्रदर्शन आयोजित किया गया।
धरना प्रदर्शन ने न केवल योजना कर्मियों की समस्या को उजागर किया, बल्कि राज्य और केंद्र सरकार के सामने उनके लंबे समय से लंबित मुद्दों की अनदेखी पर गंभीर सवाल भी उठाए। यह आंदोलन योजना कर्मियों के अधिकारों और सामाजिक न्याय के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।
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Pratahkal Bureau
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