राज्यसभा सांसद बनने पर डॉ. सतीश पूनिया का अनूठा सम्मान: गौसेवा को भेंट किया छप्पन भोग
राज्यसभा सांसद बनने पर डॉ. सतीश पूनिया का हुआ अनोखा अभिनंदन। पारंपरिक माला-गुलदस्तों को छोड़कर गौसेवा को मिला विशेष महत्व। जानिए कैसे एक रसीद ने सेवा की नई मिसाल पेश की और डॉ. पूनिया ने समाज को क्या संदेश दिया।

खेरवाड़ा में राज्यसभा सांसद डॉ. सतीश पूनिया का अभिनंदन करते हुए भाजपा कार्यकर्ता। इस अवसर पर सामाजिक सरोकार के तहत गौसेवा के लिए सहयोग राशि भेंट की गई।
राज्यसभा सांसद के रूप में निर्वाचित होने के बाद डॉ. सतीश पूनिया के प्रति सम्मान प्रकट करने का एक अनुकरणीय उदाहरण देखने को मिला। भाजपा हरियाणा के प्रभारी और पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया के निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुने जाने पर भाजपा आपदा राहत विभाग राजस्थान के प्रदेश संयोजक डॉ. जिनेंद्र शास्त्री ने एक सादगीपूर्ण और प्रेरणादायक समारोह में उनका अभिनंदन किया। खेरवाड़ा में आयोजित इस कार्यक्रम में डॉ. शास्त्री ने उन्हें उपरणा पहनाकर सम्मानित किया, जिसमें भाजयुमो नेता उज्जवल जैन और सूरत के समाजसेवी विश्वनाथ भी सम्मिलित हुए।
इस अभिनंदन समारोह की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता डॉ. सतीश पूनिया के 'अभिनंदन एक मुस्कान से' अभियान का सक्रिय समर्थन रहा। डॉ. जिनेंद्र शास्त्री ने सम्मान के पारंपरिक तरीकों जैसे माला या गुलदस्ते के स्थान पर सामाजिक सरोकार को प्राथमिकता दी। उन्होंने श्री गुरु कमल चंद्रोशन गौ सेवा ट्रस्ट द्वारा संचालित गौशाला में 'छप्पन भोग' सेवा हेतु 45,000 रुपये की रसीद भेंट की। यह सेवा कार्य ट्रस्ट के संस्थापक संजय जैन और स्वीटी जैन के निर्देशन में संपन्न किया जाएगा।
डॉ. पूनिया ने इस अवसर पर उपस्थित कार्यकर्ताओं और समर्थकों का आह्वान करते हुए कहा कि सम्मान स्वरूप भेंट किए जाने वाले महंगे तोहफों, मालाओं और गुलदस्तों के स्थान पर जनसेवा, गौसेवा और लोकहितकारी गतिविधियों में योगदान देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे ऐसी सेवाओं की रसीद या उपयोगी पुस्तकें भेंट करने की परंपरा को अपनाएं, ताकि सकारात्मक बदलाव की इस पहल को व्यापक आधार मिल सके। डॉ. पूनिया ने इस परंपरा को संसाधनों के सदुपयोग और सेवा की संस्कृति को मजबूती प्रदान करने वाला एक सार्थक कदम बताया।

