राजस्थान में महिला अधिकारिता विभाग के अंतर्गत कार्यरत साथिनों ने 22 जुलाई 2026 को जारी कार्यालय आदेश को निरस्त करवाने सहित अपनी विभिन्न मांगों को लेकर माननीय उप मुख्यमंत्री एवं केबिनेट मंत्री, महिला एवं बाल विकास विभाग, राजस्थान सरकार को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन दिनांक 23-07-2026 को प्रस्तुत किया गया, जिसमें ग्राम पंचायत कार्यालय में साथिनों की बैठक व्यवस्था सुनिश्चित करने और उनकी न्यायोचित मांगों के समाधान की मांग की गई है।

ज्ञापन में कहा गया है कि महिला अधिकारिता विभाग के अंतर्गत कार्यरत साथिनें ग्राम पंचायत स्तर पर महिलाओं की सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, महिला अधिकारों के संरक्षण, बालिका शिक्षा, लैंगिक समानता, विभागीय योजनाओं के प्रचार-प्रसार, जनजागरुकता एवं लाभार्थियों से समन्वय जैसे महत्वपूर्ण दायित्वों का वर्षों से निष्ठापूर्वक निर्वहन कर रही हैं। साथिन ग्राम पंचायत स्तरीय मानदेय कार्यकर्ता है, जिसकी अपनी स्वतंत्र विभागीय पहचान एवं कार्यप्रणाली है।



ज्ञापन में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.4(0) परावि/आप्र/RGSA/Sathin/2024-25/41438 का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि समस्त जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि साथिन परियोजना के सुचारु संचालन के लिए साथिन कार्यकर्ताओं के ग्राम पंचायत कार्यालय में बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इस आदेश का उद्देश्य साथिनों को ग्राम पंचायत स्तर पर संस्थागत पहचान और कार्य करने के लिए उपयुक्त स्थान उपलब्ध कराना था।

ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि उक्त आदेश का आज तक प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो पाया। इसके विपरीत निदेशालय महिला अधिकारिता द्वारा दिनांक 22.07.2026 को जारी कार्यालय आदेश के माध्यम से साथिनों की बैठकों का मुख्यालय मुख्य आंगनबाड़ी केन्द्र निर्धारित कर दिया गया है।

साथिनों ने इस आदेश को कई कारणों से उचित नहीं बताया है। ज्ञापन में कहा गया है कि साथिन महिला अधिकारिता विभाग की कार्यकर्ता है, जबकि आंगनबाड़ी केन्द्र समेकित बाल विकास सेवाएं (ICDS) की व्यवस्था का भाग है। साथिन का कार्यक्षेत्र महिला सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण एवं विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन से संबंधित है, न कि ICDS की प्रशासनिक व्यवस्था से।

ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि पूर्व में ग्राम पंचायत कार्यालय में बैठक व्यवस्था सुनिश्चित करने का शासनादेश जारी होने के बावजूद नया आदेश जारी करना प्रशासनिक समन्वय एवं शासन की मंशा के विपरीत है। साथिनों का कहना है कि यह आदेश उनकी स्वतंत्र विभागीय पहचान, गरिमा एवं आत्मसम्मान को प्रभावित करता है तथा भविष्य में उनके मूल कार्यक्षेत्र पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

ज्ञापन के माध्यम से साथिनों ने मांग की है कि निदेशालय महिला अधिकारिता द्वारा दिनांक 22.07.2026 को जारी कार्यालय आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। साथ ही ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.4(0) परावि/आप्र/RGSA/Sathin/2024-25/41438 का प्रभावी क्रियान्वयन करते हुए सभी साथिनों की बैठक एवं बैठने की व्यवस्था ग्राम पंचायत कार्यालय में सुनिश्चित कराई जाए।

इसके अलावा साथिनों ने स्वतंत्र विभागीय पहचान, कार्यक्षेत्र एवं गरिमा को सुरक्षित रखने के लिए स्पष्ट शासनादेश जारी करने, उन्हें मूल दायित्वों के अतिरिक्त अन्य विभागों के कार्यों में नहीं लगाने, मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि करने, सामाजिक सुरक्षा एवं सेवा सुरक्षा प्रदान करने तथा लंबे समय से कार्यरत साथिनों के लिए नियमितीकरण अथवा स्थायी सेवा नीति बनाने की मांग रखी है।

ज्ञापन में विभागीय कार्यों के प्रभावी संचालन के लिए आवश्यक संसाधन, प्रशिक्षण एवं प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराने तथा शहरी क्षेत्रों में भी "साथिन" के पद सृजित करने की मांग की गई है। साथिनों ने कहा है कि वर्तमान में साथिन व्यवस्था केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित है, जिसके कारण शहरी क्षेत्रों में महिला सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण एवं विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में कमी बनी हुई है। महिलाओं के विरुद्ध हिंसा एवं अपराध ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में समान रूप से होते हैं, इसलिए सभी नगरीय निकायों में भी साथिन के पद सृजित कर नियुक्तियां की जानी चाहिए।

ज्ञापन में कहा गया है कि साथिनें प्रदेश के प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर महिला सशक्तिकरण की आधारशिला हैं। यदि उनकी स्वतंत्र पहचान एवं सम्मान सुरक्षित नहीं रहेगा तो इसका प्रभाव विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी पड़ेगा। साथिनों ने उप मुख्यमंत्री एवं केबिनेट मंत्री से उपरोक्त तथ्यों पर संवेदनशीलतापूर्वक विचार करते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय प्रदान करने का अनुरोध किया है।

ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो समस्त साथिनें अपने संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक अधिकारों के अंतर्गत चरणबद्ध एवं शांतिपूर्ण तरीके से सामूहिक ज्ञापन, धरना, प्रदर्शन एवं अन्य वैधानिक कार्यक्रम आयोजित करने के लिए बाध्य होंगी, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी विभाग की होगी।

ज्ञापन के साथ ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.4(0) परावि/आप्र/RGSA/Sathin/2024-25/41438 दिनांक 23.08.20241 तथा निदेशालय महिला अधिकारिता का आदेश क्रमांक एफ19(1)(3)/साथिन विविध/2013-14/00734/4538 दिनांक 22.07.20261 संलग्न किए गए हैं।

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (पंचायती राज) द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ.4(0) परावि/आप्र/RGSA/Sathin/2024-25/41438 जयपुर दिनांक के तहत मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद-समस्त को "साथिन" के बैठने की व्यवस्था के संबंध में निर्देश दिए गए थे। आदेश में बताया गया था कि राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान योजनान्तर्गत साथिन कार्यकर्ताओं को ग्राम पंचायत स्तर पर प्रशिक्षक एवं सहयोगी के रूप में विकसित करने के लिए यूनिसेफ राजस्थान के सहयोग से "साथिन" परियोजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है।

आदेश में कहा गया था कि "साथिन" परियोजना के सुचारु संचालन के लिए साथिन कार्यकर्ताओं के ग्राम पंचायत कार्यालय में बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित कराते हुए इस संबंध में की गई कार्यवाही से विभाग को अवगत करवाना सुनिश्चित करें। इस आदेश को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करने के निर्देश दिए गए थे। आदेश पर (रवि जैन) शासन सचिव एवं आयुक्त के हस्ताक्षर हैं।

वहीं महिला अधिकारिता के कार्यालय आदेश में कहा गया है कि ग्राम पंचायत क्षेत्र पर कार्यरत ग्राम साथिनों द्वारा अपने ग्राम पंचायत क्षेत्र में संचालित गतिविधियों, विभागीय योजनाओं की प्रगति, लाभार्थियों से समन्वय, जागरूकता गतिविधियों, योजनाओं के प्रचार-प्रसार एवं अन्य आवश्यक कार्यों के संबंध में नियमित बैठकें आयोजित की जाती हैं। साथिनों को बैठक आयोजित करवाने और स्वयं के बैठने के लिए उचित एवं सुविधाजनक स्थान उपलब्ध करवाने के दृष्टिगत संबंधित ग्राम पंचायत मुख्यालय पर स्थित मुख्य आंगनबाड़ी केन्द्र पर साथिनों की बैठक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इनका मुख्यालय भी यही होगा, जिससे विभागीय कार्यों का क्रियान्वयन प्रभावी रूप से संपादित हो सके। यह सक्षम स्तर से अनुमोदित है।

इस कार्यालय आदेश पर (राकेश राजोरिया), आई.ए.एस. आयुक्त महिला अधिकारिता और (वासुदेव मालावत), आई.ए.एस. निदेशक, समेकित बाल विकास सेवाएँ, जयपुर के नाम अंकित हैं। आदेश दिनांक 22-7-286 और क्रमांक एफ 19(1)(3)/साथिन विविध/2013-14/00734/4539-48 के तहत इसकी प्रतिलिपि विशिष्ट सहायक, माननीय उप मुख्यमंत्री महोदया, महिला एवं बाल विकास विभाग, जयपुर; विशिष्ट सहायक, माननीय राज्यमंत्री महोदया, महिला एवं बाल विकास विभाग, जयपुर; निजी सचिव, शासन सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग, जयपुर; निजी सचिव, आयुक्त, महिला अधिकारिता, जयपुर; निजी सचिव, निदेशक, समेकित बाल विकास सेवाएँ, जयपुर; समस्त जिला कलक्टर, राजस्थान; उपनिदेशक, महिला एवं बाल विकास विभाग, समस्त; उपनिदेशक/सहायक निदेशक, महिला अधिकारिता, समस्त तथा प्रोग्रामर, महिला अधिकारिता, मुख्यालय को विभागीय वेबसाइट पर अपलोड करने के लिए भेजी गई है।

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Pratahkal Newsroom

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