बड़ी सादड़ी में सेवा की सरिता: पंचमुखी बालाजी संस्थान ने 8 गांवों में फैलाई गर्माहट, मानवता की मिसाल पेश
बड़ी सादड़ी में श्री पंचमुखी बालाजी सेवा संस्थान द्वारा आयोजित वस्त्र वितरण अभियान ने मानवता की नई मिसाल पेश की है। राजपुरा और दलपुरा सहित 8 गांवों में जरूरतमंदों को ऊनी कपड़े और कंबल वितरित किए गए। शिक्षाविद् घीसूलाल पगारिया के सहयोग और सावरकर सभागार में स्थापित वस्त्र बैंक के माध्यम से सेवा का यह प्रकल्प निरंतर जारी है।

बड़ी सादड़ी। कड़कड़ाती ठंड और अभावों के बीच जब मानवता की पुकार गूंजती है, तो समाज के संवेदनशील हाथ स्वतः ही सेवा के लिए आगे बढ़ आते हैं। चित्तौड़गढ़ जिले के बड़ी सादड़ी क्षेत्र में इन दिनों कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिल रहा है, जहां श्री पंचमुखी बालाजी सेवा संस्थान ने सेवा के संकल्प को धरातल पर उतारते हुए एक व्यापक वस्त्र वितरण अभियान छेड़ रखा है। संस्थान के सेवाभावी कार्यकर्ताओं ने पिछले तीन दिनों के भीतर क्षेत्र के 8 दुर्गम गांवों तक पहुंच बनाकर सैकड़ों जरूरतमंद परिवारों के चेहरों पर मुस्कान बिखेरी है।
इस पुनीत कार्य का शुभारंभ नगरवासियों के अटूट विश्वास और सहयोग से हुआ। संस्थान की एक अपील पर नगर के निवासियों ने उदारता का परिचय देते हुए अपने घरों से ऊनी वस्त्र, कंबल और साड़ियाँ दान स्वरूप भेंट कीं। इस अभियान को उस समय और अधिक बल मिला जब शिक्षाविद् घीसूलाल पगारिया ने अपनी संवेदनशीलता का परिचय देते हुए 11,101 रुपये की नकद राशि संस्थान को सुपुर्द की। इस धनराशि का उपयोग संस्थान द्वारा नए वस्त्रों और अन्य आवश्यक सामग्रियों को क्रय करने में किया जा रहा है, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति ठंड की मार सहने को मजबूर न हो।
संस्थान ने सेवा की इस प्रक्रिया को व्यवस्थित रूप देने के लिए मंदिर परिसर स्थित सावरकर सभागार में एक स्थायी 'वस्त्र बैंक' की स्थापना की है। यह बैंक न केवल संग्रहण केंद्र के रूप में कार्य कर रहा है, बल्कि यहां से प्रतिदिन जरूरतमंदों को उनकी आवश्यकता अनुसार कपड़े उपलब्ध कराए जा रहे हैं। अभियान के दूसरे चरण के तहत संस्थान की टोली ने राजपुरा, दलपुरा, नयाखेड़ा, मानपुरा भाटखेड़ी, कटाई महादेव, करमदियाखेड़ी, बोरण्डी, सरीपीपली और पुला मंगरा जैसे ग्रामीण अंचलों का दौरा किया।
इस पूरे अभियान को सफल बनाने में कार्यकर्ताओं की निष्ठा सराहनीय रही। दिनेश माली, शंभूलाल मीणा, दिनेश मीणा, छगन जटिया, बालकिशन मीणा, अविनाश जैन और ऋषीलव मुनेत ने गांव-गांव जाकर पात्र व्यक्तियों की पहचान की और उन्हें ससम्मान सामग्री वितरित की। यह अभियान महज कपड़ों का वितरण नहीं, बल्कि समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को यह अहसास कराना है कि वह अकेला नहीं है। श्री पंचमुखी बालाजी सेवा संस्थान का यह प्रयास आज पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और दानदाताओं के बढ़ते सहयोग ने यह सिद्ध कर दिया है कि सेवा ही परमो धर्म है।

Pratahkal Bureau
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