वल्लभनगर के विद्या निकेतन में गूंजा सरस्वती वंदना का स्वर, 45 नन्हे हाथों ने 'ओम' लिखकर किया शिक्षा का शंखनाद
उदयपुर के वल्लभनगर स्थित विद्या निकेतन विद्यालय में बसंत पंचमी पर भव्य उत्सव आयोजित किया गया, जहाँ 45 बच्चों का 'ओम' लिखवाकर विद्यारंभ संस्कार संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में 80 हजार की सेवानिधि अर्पित की गई और 65 नए छात्रों का स्वागत हुआ। मंत्रोच्चार और यज्ञ के बीच बच्चों ने शिक्षा के सफर की शुरुआत की। पूरी खबर पढ़ें।

वल्लभनगर (उदयपुर)। मेवाड़ की धरा पर ज्ञान और आध्यात्म के संगम बसंत पंचमी के पावन अवसर पर वल्लभनगर स्थित विद्या निकेतन माध्यमिक विद्यालय में एक अनुपम दृश्य देखने को मिला। विद्या की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती के जन्मोत्सव पर पूरा विद्यालय परिसर भक्ति और उत्साह के रंग में सराबोर नजर आया। यह दिन केवल एक पर्व मात्र नहीं रहा, बल्कि दर्जनों नौनिहालों के जीवन में शिक्षा के उजाले की पहली किरण बनकर उतरा। भक्तिमय माहौल और मंत्रोच्चार के बीच आयोजित इस भव्य समारोह ने शिक्षा और संस्कारों के अद्भुत तालमेल को जीवंत कर दिया।
उत्सव का मुख्य आकर्षण 45 नन्हे भैया-बहनों का पारंपरिक 'विद्यारंभ संस्कार' रहा। कुमकुम के पावन लेप से बच्चों के कर-कमलों द्वारा 'ओम' आकृति बनवाकर उनके शैक्षणिक सफर का श्रीगणेश किया गया। इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने के साथ ही विद्यालय में 65 नए छात्र-छात्राओं का प्रवेश भी सुनिश्चित हुआ, जिनका माला पहनाकर और पोथी पूजन के माध्यम से आत्मीय स्वागत किया गया। कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाने के लिए विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष मीठालाल खेरोदिया, मुकेश पोखरणा और विनोद चोरडिया बतौर अतिथि उपस्थित रहे। विद्यालय के आचार्य कैलाश चंद्र आमेटा ने परंपरा का निर्वहन करते हुए अतिथियों का तिलक लगाकर और रक्षा सूत्र बांधकर भव्य अभिनंदन किया।
आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करने के लिए पंडित मांगीलाल आमेटा के सानिध्य में एक विशाल यज्ञ का अनुष्ठान किया गया। आहुतियों की सुगंध और वैदिक मंत्रों के बीच नव-प्रवेशित बच्चों के लगभग 20 अभिभावकों ने भी यज्ञ में सहभागिता कर अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस दौरान विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने अपनी ओर से एकत्र की गई 80 हजार रुपये की 'सेवानिधि' माँ सरस्वती के चरणों में अर्पित कर अपनी सेवा भावना का परिचय दिया। दान और समर्पण की इस मिसाल को देखते हुए विद्यालय परिवार ने सेवानिधि देने वाले छात्रों का माला पहनाकर विशेष उत्साहवर्धन किया।
समारोह के समापन सत्र में प्रधानाध्यापक गजेंद्र पाल सिंह ने उपस्थित जनसमूह और छात्रों को संबोधित करते हुए बसंत पंचमी के आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सेवानिधि का मुख्य उद्देश्य समाज के वंचित वर्गों की सहायता करना और छात्रों में परोपकार के गुण विकसित करना है। कार्यक्रम की विस्तृत रिपोर्ट और सफल संचालन प्रभारी तेजल दवे द्वारा प्रस्तुत किया गया। यह आयोजन न केवल शिक्षा की शुरुआत का प्रतीक बना, बल्कि समाज को संस्कारयुक्त शिक्षा के महत्व का संदेश देने में भी सफल रहा।

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