उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर में दान-पुण्य और परोपकार का पर्व मकर संक्रांति इस बार केवल परंपराओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे 'सहस्त्रबाहु नारी शक्ति संगठन' ने सेवा की एक नई इबारत लिखते हुए मनाया। संगठन की महिलाओं ने शहर के विभिन्न कोनों में पहुँचकर न केवल बेसहारा बुजुर्गों के जीवन में गर्माहट भरी, बल्कि विशेष बच्चों के भविष्य को संवारने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम बढ़ाए। मकर संक्रांति के इस पावन अवसर पर मानवता की सेवा का यह दृश्य शहरवासियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गया है।

संगठन की अध्यक्ष निर्मला जयसवाल के नेतृत्व में सेवा का यह कारवां सबसे पहले बीलिया गांव स्थित दीपक संस्थान पहुंचा। यहाँ रह रही बेआसरा और वृद्ध महिलाओं की आंखों में उस वक्त खुशी के आंसू छलक आए जब संगठन के सदस्यों ने उन्हें सर्दी से बचाव के लिए कंबल भेंट किए। त्योहार की मिठास को साझा करते हुए इन महिलाओं को गेहूं और पारंपरिक तिल-गुड़ के लड्डू वितरित किए गए। अपनों से दूर इन बुजुर्ग महिलाओं के लिए यह केवल एक दान नहीं, बल्कि समाज की ओर से मिला सम्मान और अपनत्व था, जिसने उनके एकाकी जीवन में उत्सव का रंग भर दिया।

सेवा के इस क्रम को आगे बढ़ाते हुए संगठन के सदस्य सज्जन नगर स्थित अभिलाषा मूक-बधिर विद्यालय पहुंचे। यहाँ की चैरिटी ने शिक्षा और संवेदना का एक अनूठा उदाहरण पेश किया। विद्यालय में अध्ययनरत 280 मूक-बधिर बच्चों को शैक्षिक सामग्री के रूप में रजिस्टर वितरित किए गए। इस दौरान संगठन के सदस्यों ने विद्यालय की कक्षाओं का अवलोकन किया और वहां की स्वच्छता व तकनीकी शिक्षण प्रणाली की सराहना की। बच्चों के भीतर सीखने की तीव्र ललक और कंप्यूटर लैब में उनकी दक्षता देख सभी सदस्य अभिभूत हो गए। मूक-बधिर बच्चों की आंखों में भविष्य के सपने और उनकी पढ़ने की तकनीक ने संगठन के सदस्यों को एक सुखद और गौरवशाली अनुभव से भर दिया।

इस पुनीत कार्य को सफल बनाने में संगठन की सक्रिय सदस्य चंद्रकला, नीतू, नम्रता चौधरी, धारावती सुहालका, गजेंद्र चौधरी, रश्मि और ज्ञानचंद जायसवाल का विशेष और सराहनीय सहयोग रहा। सेवा का यह संकल्प केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि समाज के वंचित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने की एक ईमानदार कोशिश के रूप में उभरा है। सहस्त्रबाहु नारी शक्ति संगठन के इन प्रयासों ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि नारी शक्ति एकजुट होकर सेवा का बीड़ा उठाए, तो समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन में भी सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

Pratahkal Bureau

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