सागवाड़ा (प्रातःकाल संवाददाता)। आधुनिक कृषि के नाम पर खेतों में घोले जा रहे रासायनिक जहर के खिलाफ और गोवंश आधारित कृषि क्रांति को गति देने के लिए सागवाड़ा के सरोदा मार्ग पर वमासा स्थित राधाकृष्ण गोशाला में रविवार को भारतीय किसान संघ के तत्वावधान में एक विशाल 'गोधरित प्राकृतिक खेती' विषयक किसान सम्मेलन का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। इस सम्मेलन ने क्षेत्र के किसानों को पारंपरिक एवं विषमुक्त खेती की ओर लौटने का एक सशक्त संदेश दिया है।

कार्यक्रम के मुख्य मंच से प्रगतिशील किसान गोपालजी सुथारिया सहित अनेक अनुभवी कृषकों ने उपस्थित जनसमुदाय और कृषक भाइयों के साथ अपने धरातलीय अनुभवों को साझा करते हुए प्राकृतिक कृषि की महत्ता पर विशेष प्रकाश डाला। वक्ताओं ने अत्यंत गंभीर लहजे में देश को आगाह किया कि गोपालन और प्राकृतिक कृषि को अपनाकर ही पेस्टीसाइड, यूरिया एवं डीएपी जैसे घातक व जानलेवा रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग और चक्रव्यूह से बचा जा सकता है। उन्होंने वैज्ञानिक और पारंपरिक दृष्टिकोण को जोड़ते हुए स्पष्ट किया कि विशेष कल्चर एवं देशी गोबर खाद के उचित प्रयोग से न केवल कृषि उत्पादन और उपज में अभूतपूर्व वृद्धि की जा सकती है, बल्कि इसके सेवन से समाज को घेर रही कैंसर जैसी गंभीर और असाध्य बीमारियों से भी संपूर्ण मानव जाति का बचाव पूरी तरह संभव है। भारतीय किसान संघ द्वारा आयोजित इस वैचारिक महाकुंभ ने किसानों को आत्मनिर्भरता का मार्ग दिखाते हुए कृषि क्षेत्र में दूरगामी और स्वास्थ्यवर्धक सुधारों की नींव रख दी है।

Pratahkal HQ

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