नई दिल्ली। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरूवार शाम नई दिल्ली के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे, जिसका उद्देश्य लगभग आठ दशक पुरानी भारत-रूस साझेदारी को और सुदृढ़ करना है। वैश्विक भू-राजनीतिक जटिलताओं के बावजूद यह साझेदारी स्थिर और मजबूत बनी हुई है।

पुतिन के विमान के शाम लगभग साढ़े छह बजे नई दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर लैंड होते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। एयरपोर्ट पर दोनों नेताओं के बीच गले मिलने का दृश्य देखा गया, जिसके बाद वे एक ही कार में सवार होकर अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए। यह दृश्य कुछ महीने पहले चीन के तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में भी देखा गया था, जब दोनों नेता एक ही कार में सवार हुए थे।

प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन के आगमन के अवसर पर एक निजी रात्रिभोज का भी आयोजन किया, जिसका उद्देश्य शुक्रवार को होने वाली 23वीं भारत-रूस शिखर वार्ता के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना है। इस शिखर वार्ता में रक्षा सहयोग को मजबूत करना, भारत-रूस व्यापार को बाहरी दबावों से सुरक्षित रखना और छोटे मॉड्यूलर परमाणु संयंत्रों में सहयोग की संभावनाओं की तलाश जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। पश्चिमी देशों की करीबी निगरानी के बीच यह बैठक और भी संवेदनशील मानी जा रही है।

रूसी राष्ट्रपति का यह लगभग 27 घंटे का दौरा विशेष महत्व का है, क्योंकि यह भारत-अमेरिका संबंधों में हालिया गिरावट की पृष्ठभूमि में हो रहा है। शिखर वार्ता के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार और तकनीकी क्षेत्रों सहित कई समझौतों की उम्मीद है। शुक्रवार सुबह राष्ट्रपति भवन में पुतिन का औपचारिक स्वागत किया जाएगा, जबकि हैदराबाद हाउस में आयोजित बैठक और भोज में दोनों नेता रणनीतिक और आर्थिक सहयोग के महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा करेंगे।

इस दौरे का महत्व न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देने में है, बल्कि वैश्विक रणनीतिक संतुलन और क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग में भी इसका व्यापक असर होगा।

Pratahkal Bureau

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