राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चित्तौड़ प्रांत का संघ शिक्षा वर्ग सोमवार को फतेहनगर स्थित विद्या निकेतन माध्यमिक विद्यालय परिसर में विधिवत रूप से आरंभ हुआ। यह 15 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर अनुशासित एवं संगठित रूप में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें चित्तौड़ प्रांत के 8 विभागों के 27 जिलों से शिक्षार्थी प्रशिक्षण हेतु पहुंचे हैं।

कार्यक्रम का शुभारंभ खमनोर के पूज्य संत एवं प्रसिद्ध कथाकार ज्ञानानंद जी महाराज, क्षेत्र संघचालक डॉ. रमेश अग्रवाल, वर्ग सर्वाधिकारी महेश आमेटा एवं सह प्रांत प्रचारक डॉ. धर्मेंद्र सिंह द्वारा मां भारती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्चन के साथ किया गया। इसके पश्चात विद्यालय परिसर स्थित मां सरस्वती मंदिर में यज्ञ का आयोजन किया गया तथा शास्त्रों एवं जनजातीय नायकों पर आधारित विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन भी अतिथियों द्वारा किया गया।

उद्घाटन सत्र में ज्ञानानंद जी महाराज ने कार्यकर्ता की परिभाषा स्पष्ट करते हुए कहा कि सच्चा कार्यकर्ता वही है, जिसमें कार्य तो दिखाई दे, किंतु कर्ता का अहंकार न दिखे। उन्होंने कहा कि समाज की आवश्यकता को समझते हुए सभी को गुणवान एवं चरित्रवान बनकर सेवा कार्यों में सक्रिय होना चाहिए। उनके अनुसार उन्नत विचार और उच्च जीवन मूल्य ही व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के समग्र विकास का आधार हैं।

मुख्य वक्ता डॉ. रमेश अग्रवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना का मूल उद्देश्य हिंदू समाज का संगठन है। इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु शाखा पद्धति एक सशक्त माध्यम है, जहां व्यक्ति निर्माण से समाज परिवर्तन और समाज परिवर्तन से राष्ट्र निर्माण का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने समाज में व्याप्त अकेलेपन की भावना को समाप्त करने पर बल देते हुए कहा कि संघ शिक्षा वर्ग इस दिशा में एक साधना स्थल है, जहां स्वयंसेवक 15 दिनों तक सामूहिक जीवन का अभ्यास करते हैं।

उन्होंने विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से सामूहिकता के महत्व को रेखांकित करते हुए स्वयंसेवकों का मार्गदर्शन किया। इस प्रशिक्षण वर्ग में प्रतिदिन प्रातः से रात्रि तक निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शारीरिक एवं बौद्धिक सत्र आयोजित किए जाएंगे।

समापन अवसर पर प्रतिभा प्रकट कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा, जिसमें शिक्षार्थी अपने प्रशिक्षण, अनुशासन एवं विभिन्न कौशलों का प्रदर्शन करेंगे।

वर्ग की विशेष विशेषता यह है कि इसकी संपूर्ण व्यवस्थाएं स्वयं संघ के कार्यकर्ताओं द्वारा संचालित की जा रही हैं। भोजन, आवास, स्वच्छता, चिकित्सा, सुरक्षा एवं जल प्रबंधन सहित सभी व्यवस्थाएं सेवा भाव से संपन्न हो रही हैं। बिना किसी विशेष सुविधा की अपेक्षा के अनुशासित एवं आत्मीय वातावरण में कार्य करना संघ की कार्यपद्धति और सामूहिक जीवन का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।

वर्ग परिसर में लगाई गई प्रदर्शनी में राष्ट्र जागरण, सेवा, सामाजिक समरसता, ग्राम विकास, परिवार प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण एवं संगठन विस्तार से जुड़े विभिन्न विषयों को चित्रों एवं जानकारी के माध्यम से प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया गया है। यह आयोजन संगठनात्मक अनुशासन, सेवा भाव और सामूहिक जीवन मूल्यों का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है।

Pratahkal Bureau

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