फतेहनगर: आरएसएस की प्रबुद्ध जन गोष्ठी में राष्ट्र निर्माण और समरसता पर मंथन
सह प्रांत कार्यवाह दीपक शुक्ल ने व्यक्ति निर्माण को समाज परिवर्तन का आधार बताया और कुटुंब व्यवस्था व सामाजिक मूल्यों को सुदृढ़ करने पर बल दिया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, खंड फतेहनगर के तत्वाधान में रविवार को विद्या निकेतन सभागार में एक भव्य 'प्रमुख जन गोष्ठी' का आयोजन किया गया, जिसमें राष्ट्र निर्माण, संस्कारों के संवर्धन और सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर गहन मंथन हुआ। शाम 4:00 बजे आयोजित इस कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं 'वंदे मातरम्' के सामूहिक गान के साथ किया गया। देशभक्ति के स्वरों से गुंजायमान वातावरण में "भारत प्यारा देश हमारा आगे बढ़ता जाता है..." और "वह जीवन भी क्या जीवन है जो काम देश के न आ सका" जैसे गीतों ने उपस्थित जनसमूह में राष्ट्रभक्ति का ज्वार उत्पन्न कर दिया।
मंच पर मुख्य वक्ता के रूप में सह प्रांत कार्यवाह दीपक शुक्ल, भिंडर जिला संघ चालक भारत सिंह झाला एवं खंड संचालक धनपाल सेठ गरिमामयी उपस्थिति में विराजमान रहे। मुख्य वक्ता दीपक शुक्ल ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में संघ की स्थापना के मूल उद्देश्यों को रेखांकित करते हुए कहा कि व्यक्ति निर्माण ही समाज में सकारात्मक परिवर्तन का एकमात्र मार्ग है। उन्होंने विशेष रूप से संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले हिंदू सम्मेलन और विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों की प्रासंगिकता पर बल दिया।
शुक्ल ने "मैं और मेरा परिवार" तक सीमित होती आधुनिक सोच पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए व्यापक सामाजिक चिंतन का आह्वान किया। उन्होंने कश्मीर से धारा 370 हटाने के ऐतिहासिक निर्णय को राष्ट्रीय एकता का मील का पत्थर बताया। उनके अनुसार, संघ की शाखाएं केवल अनुशासन ही नहीं, बल्कि राष्ट्र सर्वोपरि की भावना और चरित्र निर्माण की कार्यशालाएं हैं। हिंदुत्व को जीवन जीने की विशिष्ट पद्धति बताते हुए उन्होंने "अतिथि देवो भव:" जैसे सांस्कृतिक मूल्यों और परंपराओं को जीवन में आत्मसात करने की आवश्यकता जताई।
समाज में व्याप्त विघटनकारी प्रवृत्तियों और हिंदू समाज को खंडित करने के प्रयासों पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान पीढ़ी में राष्ट्रीयता का भाव जगाना प्रबुद्ध जनों का नैतिक उत्तरदायित्व है। गोष्ठी में कमजोर होती कुटुंब व्यवस्था और सामाजिक समरसता पर भी गंभीर चर्चा हुई। वक्ताओं का स्पष्ट मत था कि सामाजिक परिवर्तन से ही व्यवस्थाएं सुदृढ़ होंगी। कार्यक्रम के अंत में फतेहनगर खंड के विभिन्न गांवों से आए प्रबुद्ध नागरिकों ने अपने सारगर्भित सुझाव और अनुभव साझा किए, जिससे इस वैचारिक विमर्श को नई दिशा प्राप्त हुई।

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