राजसमंद: दुग्ध संघ में भ्रष्टाचार का बड़ा धमाका, प्रबंध संचालक बराला पर करोड़ों के वारे-न्यारे और अनैतिक वसूली के संगीन आरोप
राजसमंद जिला दुग्ध संघ में भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा! प्रबंध संचालक अनिल कुमार बराला पर वित्तीय अनियमितता, टैंकर अनुबंधों में धांधली और मुख्यमंत्री संभल योजना में फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप लगे हैं। अध्यक्ष और सदस्यों ने जयपुर में उच्चाधिकारियों से लिखित शिकायत कर जांच की मांग की है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

नाथद्वारा। राजसमंद जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ इन दिनों श्वेत क्रांति नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के काले सायों को लेकर सुर्खियों में है। संघ के प्रबंध संचालक अनिल कुमार बराला पर पद के दुरुपयोग, वित्तीय अनियमितताओं और मनमानी के ऐसे गंभीर आरोप लगे हैं, जिन्होंने सहकारिता जगत में हड़कंप मचा दिया है। दुग्ध संघ के अध्यक्ष और मंडल सदस्यों ने एक सुर में मोर्चा खोलते हुए जयपुर में प्रमुख शासन सचिव सहित उच्चाधिकारियों को लिखित शिकायत सौंपकर इस पूरे तंत्र की निष्पक्ष जांच की मांग की है। यह मामला केवल कागजी हेराफेरी का नहीं, बल्कि उन हजारों दुग्ध उत्पादकों के हक पर डाका डालने का है, जिनकी मेहनत के पसीने से यह संघ फलता-फूलता है।
घटनाक्रम के अनुसार, प्रबंध संचालक अनिल कुमार बराला पर नियमों को ताक पर रखकर कार्य करने के कई सनसनीखेज आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि नियमानुसार हर तीन माह में होने वाली संचालक मंडल की बैठक को बराला ने जान-बूझकर लंबे समय तक लटकाए रखा। आखिरकार जब 10 नवंबर को बैठक संपन्न हुई, तो उसके नियम भी हवा में उड़ा दिए गए। नियम कहता है कि बैठक की कार्यवाही (मिनट्स) 48 घंटों के भीतर सभी सदस्यों को भेजी जानी चाहिए, लेकिन हफ्तों बीत जाने के बाद भी सदस्यों को अंधेरे में रखा गया है। यह प्रशासनिक पारदर्शिता पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।
भ्रष्टाचार की जड़ें परिवहन अनुबंधों तक फैली नजर आती हैं। आरोपों के मुताबिक, दुग्ध मार्गों पर चल रहे टैंकरों के अनुबंध समाप्त होने के बावजूद उन्हें नियम विरुद्ध एक वर्ष का विस्तार दिया गया। इतना ही नहीं, कम दरों पर काम करने वाले अनुबंधकों को डरा-धमका कर उनसे अनैतिक वसूली के आरोप भी प्रबंध संचालक पर मढ़े गए हैं। मण्डल सदस्यों का दावा है कि बराला ने अपने चहेते ठेकेदार को 28.18 रुपये प्रति किलोमीटर की ऊंची दर पर अनुबंध देकर संघ को सालाना करीब 60 लाख रुपये का चूना लगाया है। यह सीधा नुकसान उन पशुपालकों की जेब पर वार है, जो संभल की आस में संघ से जुड़े हैं।
सबसे चौंकाने वाला खुलासा 'मुख्यमंत्री संभल योजना' को लेकर हुआ है। शिकायत में आरोप है कि इस योजना में भारी अनैतिकता बरतते हुए विशेष समिति के दुग्धदाताओं के स्थान पर स्वयं के खाता नंबरों का उपयोग किया गया, जिससे वास्तविक हकदार अपने लाभ से वंचित रह गए। इस धांधली ने न केवल सरकार की जनहितकारी योजनाओं की साख पर बट्टा लगाया है, बल्कि संघ को भी भारी वित्तीय घाटा पहुंचाया है। अध्यक्ष और संघ सदस्यों की इस सक्रियता ने अब विभाग के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। जगदीश सोनी द्वारा साझा की गई तस्वीरों में अध्यक्ष और सदस्यों की गंभीरता साफ बयां करती है कि वे इस भ्रष्टाचार के विरुद्ध किसी भी स्तर तक जाने को तैयार हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर क्या कार्रवाई करता है और क्या दुग्ध उत्पादकों को उनका खोया हुआ हक वापस मिल पाएगा।

Pratahkal Bureau
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