सागवाड़ा (प्रात:काल संवाददाता)। राजस्थान उच्च शिक्षा विभाग द्वारा अस्थाई टीचिंग एसोसिएट की भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के निर्णय ने प्रदेश के हजारों विद्या संबल सहायक आचार्यों के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा दिए हैं। राज्य सरकार पिछले पांच वर्षों से सरकारी कॉलेजों में निरंतर सेवाएं दे रहे इन सहायक आचार्यों को विस्थापित कर अब पांच वर्ष के कार्यकाल हेतु नए अस्थाई टीचिंग एसोसिएट नियुक्त करने की योजना बना रही है। इस विवादास्पद निर्णय के विरोध में 'विद्या संबल सहायक आचार्य संघ, राजस्थान' के आह्वान पर संपूर्ण प्रदेश में कार्यरत आचार्यों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए विद्या संबल गलियाकोट सागवाड़ा संघ के कोषाध्यक्ष डॉ. शुभांग व्यास ने बताया कि वर्ष 2021 में उच्च शिक्षा विभाग ने विद्या संबल योजना के अंतर्गत गैस्ट फैकल्टी के रूप में इन सहायक आचार्यों की नियुक्तियां की थीं। उल्लेखनीय है कि इन सभी आचार्यों का चयन यूजीसी के कड़े नियमानुसार एपीआई (API) स्कोर और मेरिट के आधार पर पूर्ण पारदर्शिता के साथ किया गया था। अब सरकार इन अनुभवी आचार्यों को कार्यमुक्त कर एक नई लिखित परीक्षा के माध्यम से टीचिंग एसोसिएट की नियुक्ति करने की तैयारी में है, जिन्हें 28,850 रुपए मासिक वेतन दिया जाएगा।

डॉ. व्यास ने सरकार की इस नीति को शोषणकारी बताते हुए कहा कि जो आचार्य पिछले पांच वर्षों से राजकीय महाविद्यालयों की संपूर्ण शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को सफलतापूर्वक संभाल रहे हैं, उन्हें इस मोड पर बेरोजगार करना सर्वथा अनुचित है। अनुभवी शैक्षणिक स्टाफ को हटाकर पुनः अस्थाई नियुक्तियां करने का यह कदम न केवल इन शिक्षकों के साथ अन्याय है, बल्कि उच्च शिक्षा की स्थिरता पर भी प्रहार है। सहायक आचार्यों का स्पष्ट तर्क है कि जब वे पहले से ही निर्धारित योग्यताएं पूर्ण कर मेरिट के आधार पर सेवाएं दे रहे हैं, तो उन्हें हटाकर नई भर्ती प्रक्रिया थोपना उनके करियर के साथ खिलवाड़ है। यह विरोध प्रदर्शन अब एक बड़े आंदोलन का रूप लेता जा रहा है, जो राज्य की उच्च शिक्षा नीति और रोजगार सुरक्षा के दावों पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करता है।

Pratahkal HQ

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