अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ का राजस्थान में आंदोलन का ऐलान
शिक्षकों की लंबित मांगों और ग्रीष्मकालीन अवकाश में कटौती के विरोध में 14 मई से प्रदेशव्यापी चरणबद्ध आंदोलन शुरू होगा।

जयपुर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान (बाएं से दाएं) प्रदेश अध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा, प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा और संघर्ष समिति संयोजक संपत सिंह आंदोलन की रणनीति बताते हुए।
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (राजस्थान) ने शिक्षा विभाग की नीतियों, अधिकारियों की कार्यशैली और शिक्षकों की लंबित मांगों को लेकर प्रदेशव्यापी आंदोलन का ऐलान कर दिया है। जयपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में संगठन पदाधिकारियों ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि शिक्षकों के मान-सम्मान और हितों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा, प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा और संघर्ष समिति संयोजक संपत सिंह ने सरकार पर शिक्षकों की समस्याओं के समाधान में उदासीनता बरतने का आरोप लगाया। पदाधिकारियों ने कहा कि लगातार संवादहीनता और अधिकारियों की हठधर्मिता के कारण शिक्षकों को आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
महासंघ ने प्रदेशभर में चरणबद्ध आंदोलन का विस्तृत कार्यक्रम घोषित करते हुए कहा कि यदि सरकार ने शीघ्र मांगों पर कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। संगठन के अनुसार 14 मई को सभी ब्लॉक मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर उपखंड अधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे जाएंगे। इसके बाद 29 मई को जिला मुख्यालयों पर शक्ति प्रदर्शन किया जाएगा।
आंदोलन के अगले चरण में 5 जून को बीकानेर संभाग के शिक्षक शिक्षा निदेशालय बीकानेर पर धरना देंगे। वहीं 10 जून को जयपुर और उदयपुर संभाग के शिक्षक शिक्षा संकुल एवं सचिवालय के समक्ष प्रदर्शन करेंगे। 18 जून से राजधानी जयपुर में क्रमिक अनशन शुरू किया जाएगा तथा जुलाई में विधानसभा सत्र के दौरान प्रदेशभर के शिक्षक विधानसभा का घेराव करेंगे।
महासंघ ने सरकार के समक्ष कई प्रमुख मांगें भी रखी हैं। संगठन ने ग्रीष्मकालीन अवकाश में 10 दिन की कटौती को तर्कहीन बताते हुए कहा कि यदि शिक्षकों के कार्य दिवस बढ़ाए जाते हैं तो राजस्थान सेवा नियम (RSR) के तहत उपार्जित अवकाश (PL) दिया जाना चाहिए।
संगठन ने पिछले आठ वर्षों से लंबित तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थानांतरण के लिए स्पष्ट नीति बनाने, प्रबोधकों एवं अन्य श्रेणियों की वेतन विसंगतियां दूर करने तथा 33 हजार संविदा शिक्षकों को नियमित करने की मांग उठाई। इसके साथ ही RGHS योजना में निजी अस्पतालों द्वारा कैशलेस इलाज में आ रही परेशानियों को दूर करने और 6000 क्रमोन्नत विद्यालयों में व्याख्याता एवं प्रधानाचार्यों के रिक्त पद भरने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई।
प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा ने दावा किया कि प्रदेश के लगभग 4 लाख शिक्षकों में से 3 लाख शिक्षक संगठन से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और शिक्षकों के अधिकारों की रक्षा करना है। संघर्ष समिति संयोजक संपत सिंह ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं किया तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।

Pratahkal Bureau
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