मावली में शिक्षकों का धरना-प्रदर्शन: विभिन्न मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने स्थानांतरण, पदोन्नति और ग्रीष्मावकाश में कटौती के विरोध में उपखंड अधिकारी को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

मावली में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पदाधिकारी और शिक्षक सदस्य लंबित मांगों के समाधान हेतु उपखंड अधिकारी को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए।
फतहनगर। राजस्थान के शैक्षणिक हलकों में व्याप्त शिक्षकों की ज्वलंत समस्याओं और सरकार की कथित बेरुखी के विरोध में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (विद्यालय शिक्षा) राजस्थान खण्ड मावली ने निर्णायक संघर्ष का बिगुल फूंक दिया है। लंबे समय तक शासन के साथ संवाद के बावजूद समाधान न निकलने से आक्रोशित शिक्षकों ने प्रदेशव्यापी आह्वान के अंतर्गत 14 मई 2026, गुरुवार को उपखंड मुख्यालय पर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर न केवल शक्ति प्रदर्शन किया, बल्कि मुख्यमंत्री एवं शिक्षामंत्री के नाम उपखंड अधिकारी को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर समस्याओं के अविलंब निराकरण की मांग की।
संगठन के खण्ड मावली अध्यक्ष शंकरलाल जाट लदाना ने घटनाक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि शिक्षकों की मांगों का केंद्र बिंदु ग्रीष्मावकाश सहित सभी अवकाशों को यथावत रखना है, जिसमें किसी भी प्रकार की कटौती स्वीकार्य नहीं है; उन्होंने शिविरा पंचांग में तुरंत संशोधन की आवश्यकता पर बल दिया। इसके अतिरिक्त, तृतीय श्रेणी शिक्षकों सहित शेष सभी संवर्गों के स्थानांतरण शीघ्र करने और विगत वर्षों की लंबित पदोन्नतियों को अतिशीघ्र पूर्ण करने की मांग को पुरजोर तरीके से उठाया गया। ज्ञापन में क्रमोन्नत विद्यालयों में पदों की वित्तीय स्वीकृति जारी करने, स्टाफिंग पैटर्न के अनुसार पदों का सृजन कर पदस्थापन करने, शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से पूर्णतः मुक्त करने और आरजीएचएस योजना को सुचारू रखने जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे। संगठन ने प्रबोधक एवं तृतीय वेतन श्रृंखला शिक्षकों की वेतन विसंगति दूर करने, संविदा शिक्षकों को नियमित करने, टीएसपी से नॉन टीएसपी में समायोजित एवं वंचित शिक्षकों को उनके गृह जिलों में भेजने तथा कंप्यूटर अनुदेशक के कैडर का पुनः निर्धारण करने की भी मांग की है।
इस महत्वपूर्ण प्रदर्शन में संगठन की एकजुटता तब दिखाई दी जब सैकड़ों की संख्या में शिक्षक प्रतिनिधियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम में खण्ड संगठन मंत्री पुष्करलाल बड़गुर्जर, पूर्व जिला उपाध्यक्ष सुधीर कुमार शर्मा, जिला उपाध्यक्ष माध्यमिक चंद्रशेखर चौधरी, जिला उपाध्यक्ष प्राथमिक योगेश जैन, संजय गहलोत, महेश विजयवर्गीय, रामरतन कोठारी, लोकेश जीणावत, प्रहलाद बड़गुर्जर, दिनेश व्यास, कमलेश गुर्जर, शंकरलाल जाट, ऋतुराजसिंह राव, सुनील विजयवर्गीय, खंड मंत्री भूपेन्द्र कुमार पाठक, उपाध्यक्ष प्रभुलाल जाट, सभाध्यक्ष प्रकाशपुरी गोस्वामी, कोषाध्यक्ष सोहनलाल जाट, महिला मंत्री अमृता शर्मा, महिला उपाध्यक्ष संगीता वर्मा, सदस्य निरमा शर्मा, अनिता जोशी, सविता बिश्नोई, सरोज महरिया, सीमा जाखड़, मनिता, नीलम, सुनीता रानी, पूजा मीणा, राधा शर्मा, सुनीता माहौर, लीना पालीवाल, सुमन कुँवर, इंदिरा बड़गुर्जर, प्रभाती देवी, ओम कुँवर, सुनीता मीणा, लीला खटीक, रचना सिहाग, प्रियंका, शुभांशी शर्मा, सोमता चौधरी, मैना यादव, पूनम, वर्षा खत्री, प्रभावती पुजारी, आरती बालोटिया, अजय सहारण, रमेश थोरी, पुखराज प्रजापत, दिनेश आमेटा, शांतिलाल कुमावत, पवन सैनी, विनोद मीणा, राजेन्द्र वर्मा, रामनरेश विजवर्गीय, महावीर गुर्जर, सुरेश बोला, देवकीनंदन शर्मा, कैलाश जाट, दिनेश महर्षि, सुरेश कस्वां, सुरेश गुर्जर, विमल यादव, महेन्द्र बैरवा, रामावतार, प्रमोद गुप्ता, उमेश शर्मा, धनराज गुर्जर, छाजूराम, अनिल बदनका, शंकर चौधरी, सुरेश चौधरी, दुर्गाशंकर मीणा, चंद्रभान शर्मा, विनोद जाट, रविन्द्र शर्मा, अर्जुनलाल कुमावत, सूरजमल धाकड़, तेजपाल आंवला, मस्तराम, अनिल कुमार, शंकरसिंह, गंगाराम अहीर, राजकुमार मीणा, अवधेश डांगुर, गोपाल सिंह, अब्दुल गनी, रमेश शर्मा, गिरीश पालीवाल, श्रवण कुमार, मुकेश पुनिया, नवरतन सिंह, कमलेश मीणा, धर्मेंद्र बुगालिया, श्यामवीर जाट, छोटेलाल मीणा, प्रद्युम्नसिंह हाड़ा, रामराज, रामस्वरूप शर्मा, भंवरलाल डाँगी, दिगम्बर सिंह, श्योजीलाल मीणा, समय मीणा एवं भंवरलाल सहित भारी संख्या में शिक्षक शामिल हुए। यह प्रदर्शन शिक्षकों के सब्र के टूटने और उनके अधिकारों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक बनकर उभरा है, जिसका प्रभाव आने वाले समय में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर पड़ना तय है।

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