टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ सड़कों पर उतरेंगे राजस्थान के शिक्षक, 18 जून को जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन
राजस्थान के शिक्षकों ने टीईटी अनिवार्यता और सेवा अधिकारों की रक्षा के लिए 18 जून को राज्यव्यापी आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। क्या यह आक्रोश प्रदर्शन सरकार को शिक्षकों की लंबित मांगों को मानने पर मजबूर कर पाएगा? पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

राजस्थान में शिक्षक समुदाय अब अपनी मांगों और सेवा अधिकारों की रक्षा के लिए आर-पार की लड़ाई के मूड में है। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (विद्यालय शिक्षा), राजस्थान के आह्वान पर आगामी 18 जून 2026 (गुरुवार) को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर एक भव्य 'शिक्षक आक्रोश प्रदर्शन' आयोजित किया जाएगा। इस आंदोलन का मुख्य केंद्र बिंदु टीईटी (TET) की अनिवार्यता का विरोध करना है, जो विशेष रूप से वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा और प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा के नेतृत्व में आयोजित इस राज्यव्यापी आंदोलन में बड़ी संख्या में शिक्षकों की भागीदारी अपेक्षित है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि यह प्रदर्शन केवल एक औपचारिक विरोध नहीं, बल्कि राजस्थान के समस्त शिक्षक समाज के सम्मान, वरिष्ठता, पदोन्नति और उनके भविष्य की सुरक्षा के लिए एक निर्णायक कदम है। शिक्षकों का मानना है कि जो शिक्षक राष्ट्र निर्माण की नींव रखते हैं, उनके वैधानिक अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती।
प्रदर्शन के माध्यम से सरकार तक शिक्षकों की प्रमुख लंबित मांगों का एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा जाएगा। इन मांगों में टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी मुक्ति, पूर्व नियुक्त शिक्षकों की सेवा और वरिष्ठता का पूर्ण संरक्षण, पदोन्नति की बाधाओं को दूर करना और संसद में विधायी संशोधन के माध्यम से इन समस्याओं का स्थायी समाधान शामिल है। इसके अतिरिक्त, थर्ड ग्रेड शिक्षकों के स्थानांतरण की नीति, वेतन विसंगतियों का निराकरण और शिक्षकों के अन्य वैधानिक अधिकारों की बहाली को भी प्रमुखता से उठाया जाएगा।
संगठन ने प्रदेशभर के शिक्षक साथियों से एकजुट होकर जिला मुख्यालयों पर भारी संख्या में उपस्थित होने का आह्वान किया है। 'शिक्षक का सम्मान – राष्ट्र का अभिमान' का नारा देते हुए महासंघ ने संदेश दिया है कि जब शिक्षक समुदाय एकजुट होता है, तभी वास्तविक समाधान का मार्ग प्रशस्त होता है। इस राज्यव्यापी प्रदर्शन की गूंज सरकार के गलियारों तक पहुंचाने के लिए विभिन्न जिलों में तैयारियां अंतिम चरण में हैं। यह संघर्ष राजस्थान के लाखों शिक्षकों के धैर्य और उनके भविष्य के प्रति प्रतिबद्धता की परीक्षा है, जिस पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।

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