उदयपुर। प्रदेश की साहित्यिक विरासत को सहेजने और सृजन को नई ऊर्जा देने की दिशा में राजस्थान साहित्य अकादमी ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अकादमी द्वारा विभिन्न लोक-कल्याणकारी सहायता योजनाओं के अंतर्गत कुल 16.74 लाख रुपये के वित्तीय सहयोग को आधिकारिक स्वीकृति प्रदान की गई है। अकादमी सचिव डॉ. बसंत सिंह सोलंकी ने इस निर्णय की पुष्टि करते हुए बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए पांडुलिपि प्रकाशन सहयोग योजना के तहत विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है, जिसमें 112 पांडुलिपियों के प्रकाशन हेतु 11.95 लाख रुपये की राशि आवंटित की गई है। इस योजना के दायरे में साहित्य की विभिन्न विधाओं को शामिल किया गया है, जिनमें सर्वाधिक 84 काव्य कृतियां, 21 कथा एवं उपन्यास, 2 निबंध व आलोचनात्मक कृतियां तथा 5 नाटक, एकांकी एवं विविध विधाओं की पांडुलिपियां शामिल हैं।

साहित्यिक पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से अकादमी ने 21 विशिष्ट पुस्तकों के लिए 1.74 लाख रुपये और 9 साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं के प्रकाशन व संचालन हेतु 1.80 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। इसके अतिरिक्त, अकादमी ने अपने सामाजिक उत्तरदायित्व का निर्वहन करते हुए 5 साहित्यकारों को व्यक्तिगत रूप से 1.25 लाख रुपये की प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता प्रदान करने का निर्णय लिया है। अकादमी का यह व्यापक सहयोग तंत्र केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मूल ध्येय प्रदेश के रचनाकारों को निरंतर लेखन के लिए प्रोत्साहित करना और राजस्थान के साहित्यिक जगत में नवीन सृजन को बढ़ावा देना है। यह प्रशासनिक सक्रियता प्रदेश की बौद्धिक और सांस्कृतिक प्रगति में मील का पत्थर साबित होगी।

Pratahkal HQ

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