उदयपुर और जयपुर सहित संपूर्ण राजस्थान में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'जल जीवन मिशन' के क्रियान्वयन को गति देने वाले जिला सलाहकार इन दिनों गहरे आर्थिक संकट और मानसिक तनाव के दौर से गुजर रहे हैं। जमीनी स्तर पर हर घर तक नल से जल पहुंचाने के संकल्प को साकार करने में दिन-रात जुटे इन सलाहकारों को पिछले पांच माह से वेतन का भुगतान नहीं किया गया है। जनवरी 2026 से लंबित इस वेतन ने न केवल इन कर्मचारियों के परिवार की अर्थव्यवस्था को चरमरा दिया है, बल्कि विभागीय उदासीनता के प्रति उनमें भारी आक्रोश भी पनप रहा है।

अखिल भारतीय पेयजल एवं स्वच्छता संविदा कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष नवीन कुमार सारस्वत ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि जिला सलाहकारों का कार्य मिशन की सफलता के लिए आधारभूत है। ये सलाहकार ग्रामीण क्षेत्रों में मिशन की प्रगति की सतत निगरानी, तकनीकी व प्रशासनिक समन्वय, फील्ड निरीक्षण और रिपोर्टिंग जैसे चुनौतीपूर्ण कार्य पूरी निष्ठा के साथ कर रहे हैं। विभाग की कार्यप्रणाली में इन सलाहकारों की भूमिका सेतु के समान है, जो सरकार को जमीनी हकीकत से रूबरू कराते हैं। विडंबना यह है कि विभाग के लिए महत्वपूर्ण कड़ी साबित होने वाले ये कार्मिक आज स्वयं अपने हक के लिए संघर्षरत हैं।

महासंघ के प्रवक्ता डॉ. परमवीर सिंह राव ने बताया कि आर्थिक तंगी का आलम यह है कि सलाहकार अपने निजी खर्च पर फील्ड विजिट, यात्रा और दस्तावेजों का प्रबंधन करने को विवश हैं। वेतन न मिलने के कारण इन कर्मचारियों के समक्ष अपने परिवारों के भरण-पोषण, बच्चों की शिक्षा के खर्च, आवास किराया और बैंक ऋण की किस्तों को चुकाने में गंभीर कठिनाइयां उत्पन्न हो गई हैं। विभागीय अधिकारियों के साथ बार-बार पत्राचार और आग्रह के बावजूद अब तक समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। कर्मचारियों का आरोप है कि एक ओर सरकार जल जीवन मिशन को प्राथमिकता के तौर पर प्रचारित कर रही है, वहीं दूसरी ओर इस मिशन को धरातल पर उतारने वाले मानव संसाधन की घोर अनदेखी की जा रही है।

जल जीवन मिशन के माध्यम से राज्य में हजारों करोड़ रुपये के विकास कार्य संचालित किए जा रहे हैं, लेकिन इसके संचालन की मुख्य धुरी बने सलाहकारों की उपेक्षा कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा रही है। अब जिला सलाहकारों ने राज्य सरकार और संबंधित विभाग से लंबित वेतन का तत्काल भुगतान करने तथा भविष्य के लिए नियमित वेतन व्यवस्था सुनिश्चित करने की पुरजोर मांग की है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि इस संवेदनशील मुद्दे पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो इसका सीधा प्रतिकूल प्रभाव मिशन की गति और गुणवत्ता पर पड़ सकता है, जिससे ग्रामीण पेयजल व्यवस्था का लक्ष्य प्रभावित होना तय है।

Vishnu Lohar, Jhadol

Vishnu Lohar, Jhadol

नाम: विष्णु लोहार

वर्तमान पद: संवाददाता (प्रातःकाल, झाड़ोल)

कार्यक्षेत्र: झाड़ोल, उदयपुर (राजस्थान) - मुख्य रूप से झाड़ोल और गोगुंदा विधानसभा क्षेत्र एवं आसपास का ग्रामीण अंचल

अनुभव: करीब 10 वर्ष

बीट और विशेषज्ञता 

  • स्थानीय एवं ग्रामीण समाचार: झाड़ोल व गोगुंदा विधानसभा क्षेत्र, ग्रामीण पंचायतों, सामाजिक गतिविधियों तथा जनहित से जुड़े मुद्दों की नियमित कवरेज।
  • राजनीति: स्थानीय निकाय, पंचायत, विधानसभा क्षेत्र की राजनीतिक गतिविधियां, जनप्रतिनिधियों के कार्यक्रम एवं राजनीतिक घटनाक्रम।
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  • सामाजिक एवं जनहित मुद्दे: ग्रामीण समस्याएं, नागरिक सुविधाएं, सामाजिक सरोकार, सरकारी योजनाएं, ग्रामीण विकास तथा जनकल्याण से जुड़े विषयों की विशेष कवरेज।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

  • वाणिज्य स्नातक (B.Com)
  • वाणिज्य स्नातकोत्तर (M.Com)
  • B.Ed (बैचलर ऑफ एजुकेशन)
  • BSTC (बेसिक स्कूल टीचिंग सर्टिफिकेट)

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