उदयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर ने उदयपुर के सीएमएचओ डॉ शंकरलाल बामणिया को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ टेंडरों में अनियमितता के मामले में एसीबी द्वारा की जा रही जांच और कानूनी कार्रवाई पर मंगलवार को तत्काल अंतरिम रोक लगा दी। कोर्ट ने प्रारंभिक तौर पर इस कार्रवाई को सुनियोजित और दुर्भावनापूर्ण प्रतीत होने वाला बताया है, जिससे मामले ने गंभीर प्रशासनिक और कानूनी आयाम ग्रहण कर लिए हैं।

करीब डेढ़ माह पूर्व राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत डॉ बामणिया के खिलाफ जांच शुरू करने की अनुमति दी थी। एसीबी के पास उनके विरुद्ध पद के दुरुपयोग और टेंडरों में अनियमितता की शिकायत दर्ज हुई थी। प्रारंभिक जांच के बाद एसीबी ने इसे विस्तृत जांच के उपरांत कार्रवाई योग्य माना और राज्य सरकार को पत्र लिखकर अवगत कराया कि लोक सेवक द्वारा अपने शासकीय कर्तव्यों के निर्वहन में की गई कथित गड़बड़ियों की जांच के लिए धारा 17 ए के तहत अनुमति आवश्यक है। इसके बाद सरकार ने विधिवत जांच की अनुमति प्रदान कर दी थी।

उदयपुर में वर्तमान में दो सीएमएचओ कार्यरत हैं—डॉ अशोक आदित्य और डॉ शंकरलाल बामणिया। विभागीय अधिकार डॉ आदित्य के पास हैं, जबकि डॉ बामणिया राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश पर पदस्थ हैं। लंबे समय से दोनों अधिकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है, जो इस पूरे प्रकरण को और अधिक जटिल बनाती है।

हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश ने न केवल एसीबी की कार्रवाई पर विराम लगा दिया है, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्षता और प्रशासनिक निर्णयों पर भी प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं, जिससे आगे की सुनवाई और अंतिम निर्णय पर सबकी नजरें टिकी हैं।

Pratahkal HQ

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