राजस्थान शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े करते हुए शिक्षकों ने विभाग पर सौतेला व्यवहार करने का गंभीर आरोप लगाया है। जहाँ एक ओर अधिकांश विषयों की विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की प्रक्रिया पूर्ण कर संबंधित शिक्षकों को प्राध्यापक पद पर कार्यग्रहण करवा दिया गया है, वहीं वाणिज्य सहित चार महत्वपूर्ण विषयों की पदोन्नति अब तक लंबित है। इस भेदभावपूर्ण नीति के कारण प्रभावित कार्मिकों में विभाग के प्रति भारी नाराजगी और रोष व्याप्त है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मई 2025 में वाणिज्य सहित इन चार विषयों की डीपीसी प्रक्रिया को पूरा कर चयन पत्र भी जारी कर दिए गए थे। हालांकि, इसी दौरान जोधपुर हाईकोर्ट की डबल बेंच में 'अमित श्रीमाली बनाम सरकार' प्रकरण विचाराधीन होने के चलते विभाग ने आनन-फानन में जारी चयन पत्र वापस ले लिए थे। इस न्यायिक हस्तक्षेप के कारण इन विषयों के शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया अधर में लटक गई। उल्लेखनीय है कि उक्त वाद का निर्णय दिसंबर 2025 में आ चुका है, जिसमें माननीय न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि छूटे हुए अभ्यर्थियों को सम्मिलित करते हुए प्रमाणित प्रति प्राप्ति के चार सप्ताह के भीतर प्राध्यापक पद पर पदोन्नति प्रदान की जाए। अदालती आदेश को चार माह से अधिक का समय बीत जाने के उपरांत भी विभाग द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की गई है।

अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उदयपुर के जिला उपाध्यक्ष (प्रा. शि.) योगेश जैन ने सरकार और शिक्षा विभाग की इस सुस्ती पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने मांग की है कि इन चार विषयों के साथ किया जा रहा सौतेला व्यवहार तत्काल बंद हो और शीघ्र डीपीसी पूर्ण कर पदोन्नति आदेश जारी किए जाएं। योगेश जैन ने रेखांकित किया कि पदोन्नति में विलंब से न केवल शिक्षकों का मनोबल गिर रहा है, बल्कि स्कूलों में विद्यार्थियों की पढ़ाई भी बाधित हो रही है। यदि समय पर पदस्थापन होता है, तो छात्रों को विषयों के योग्य प्राध्यापक मिल सकेंगे, जिससे राज्य की शैक्षणिक व्यवस्था सुदृढ़ होगी। शिक्षक संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि विभाग ने न्यायालय के निर्देशों की पालना में शीघ्र निर्णय नहीं लिया, तो प्रभावित अभ्यर्थी उग्र आंदोलन का मार्ग अपनाने को विवश होंगे। फिलहाल, सभी की निगाहें शिक्षा विभाग के आगामी कदम पर टिकी हैं।

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