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जोधपुर हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद वाणिज्य, चित्रकला, कृषि और गृह विज्ञान विषयों में व्याख्याता पद पर डीपीसी प्रक्रिया लंबित होने से शिक्षण कार्य प्रभावित।

उदयपुर में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पदाधिकारियों ने कोर्ट के आदेश के बाद भी चार विषयों की डीपीसी प्रक्रिया पूर्ण न होने पर नाराजगी जताई।
शिक्षा विभाग द्वारा वाणिज्य सहित चार विषय—चित्रकला, कृषि और गृह विज्ञान—के साथ सौतेला व्यवहार सामने आया है, जहां अन्य सभी विषयों की डीपीसी कर यथास्थान प्राध्यापक पद पर कार्यग्रहण हाल ही में करवा दिया गया, जबकि इन चार विषयों के अभ्यर्थी अब भी पदोन्नति से वंचित हैं।
वाणिज्य सहित इन चार विषयों की डीपीसी मई 2025 में कर चयन पत्र जारी किए गए थे, लेकिन तत्काल जोधपुर हाई कोर्ट की डबल बेंच में अमित श्रीमाली बनाम सरकार के विरुद्ध वाद के कारण विभाग द्वारा चयन पत्र प्रत्याहरित कर लिए गए। इसके बाद उक्त वाद का निर्णय दिसंबर 2025 में आया, जिसमें कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि छूटे हुए अभ्यर्थियों को प्रमाणित कॉपी मिलने के चार सप्ताह के भीतर सम्मिलित कर प्राध्यापक पद पर पदोन्नति दी जाए।
कोर्ट के निर्देश के चार माह बीत जाने के बावजूद भी इस मामले में कोई कार्यवाही नहीं होने से अभ्यर्थियों में आक्रोश व्याप्त है। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उदयपुर के जिला उपाध्यक्ष प्रा. शि. योगेश जैन ने मांग की है कि इन चार विषयों के साथ भेदभाव न करते हुए शीघ्र पदोन्नति प्रदान की जाए।
उन्होंने कहा कि पदोन्नति में हो रही देरी का सीधा प्रभाव विद्यार्थियों पर पड़ रहा है, जिन्हें इन विषयों के प्राध्यापक नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

Pratahkal Bureau
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