सिक्किम के लोक भवन में मनाया गया राजस्थान दिवस, राज्यपाल और मुख्यमंत्री रहे मौजूद
राज्यपाल ओमप्रकाश माथुर की अध्यक्षता में आयोजित समारोह में कवियों ने राजस्थान के शौर्य और वीर कल्लाजी राठौड़ व सगतसिंह की गाथाओं का काव्यपाठ किया।

गंगटोक। पूर्वोत्तर के राज्य सिक्किम की पर्वत श्रृंखलाओं के मध्य स्थित गंगटोक के लोक भवन में सोमवार को राजस्थान दिवस का आयोजन अत्यंत भव्यता और गौरव के साथ संपन्न हुआ। इस विशेष अवसर पर मरुधरा की वीर प्रसूता माटी की सुगंध और राजस्थान के गौरवशाली इतिहास की प्रतिध्वनि सिक्किम की वादियों में स्पष्ट रूप से सुनाई दी। समारोह की अध्यक्षता सिक्किम के राज्यपाल ओमप्रकाश माथुर ने की, जबकि मुख्यमंत्री प्रेमसिंह तमांग सहित राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
लोक भवन के आशीर्वाद हॉल में आयोजित इस सांस्कृतिक एवं साहित्यिक समागम में राजस्थानी लोक संस्कृति की विविध प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण राजस्थान से आए प्रख्यात कवियों का काव्यपाठ रहा, जिन्होंने अपनी ओजस्वी वाणी से प्रदेश के ऐतिहासिक शौर्य को जीवंत कर दिया। उदयपुर के उभरते कवि सिद्धार्थ देवल ने अपनी रचनाओं के माध्यम से वीर कल्लाजी राठौड़ के बलिदान, हल्दीघाटी के निर्णायक युद्ध और भारत-चीन युद्ध के दौरान सिक्किम सीमा पर अदम्य साहस का परिचय देने वाले राजस्थानी वीर सगतसिंह जी के पराक्रम का सजीव चित्रण किया।
इसी क्रम में अलवर के सुप्रसिद्ध कवि विनीत चौहान ने उदयपुर जिले के वल्लभनगर स्थित ऊंठाला के युद्ध का वृत्तांत सुनाया। उन्होंने शक्तावत और चुंडावत वंश के योद्धाओं के मध्य हरावल (सेना की अग्रिम पंक्ति) में रहने की ऐतिहासिक प्रतिस्पर्धा और उनके अदम्य शौर्य का ऐसा प्रभावी वर्णन किया कि पूरा परिसर राजस्थानी वीरता के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।
इस महत्वपूर्ण गरिमामयी समारोह में राजस्थान सरकार के वन मंत्री संजय शर्मा, पूर्व विधायक धर्मनारायण जोशी, संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय सहसंयोजक चन्द्रकान्त, भाजपा नेता डॉ. विजय विप्लवी तथा दीपक डांगी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। यह आयोजन न केवल दो राज्यों के सांस्कृतिक मिलन का प्रतीक बना, बल्कि इसने सीमाओं की रक्षा में राजस्थान के वीरों के योगदान को भी रेखांकित किया।

Pratahkal Hub
प्रातःकाल हब, दै.प्रातःकाल की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा प्रातःकाल हब राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।"
