राजस्थान विधानसभा में बढ़ेंगी सीटें, अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने दी जानकारी
परिसीमन के बाद राजस्थान विधानसभा में 270 सीटें होने की संभावना, विधायकों के बैठने के लिए सदन के चतुर्थ तल पर तैयार किया जा रहा है नया हॉल।

राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी अजमेर सर्किट हाउस में मीडिया से संवाद करते हुए, जहां उन्होंने विधानसभा के विस्तार और आगामी सेमिनार की रूपरेखा साझा की।
राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष प्रो. वासुदेव देवनानी ने स्पष्ट कहा कि देश के लोकतंत्र और संविधान को किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है। सर्किट हाउस में मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत में लोकतंत्र की जड़ें अत्यंत गहरी हैं और सदियों से यहां लोकतांत्रिक व्यवस्था निरंतर संचालित हो रही है।
देवनानी ने कहा कि आधुनिक समय में भारत दुनिया का सबसे बड़ा और प्रभावी लोकतंत्र है, जहां जनता के वोटिंग के आधार पर विजेता राजनीतिक दल को शांतिपूर्ण तरीके से सत्ता का हस्तांतरण होना इसकी मजबूती का सटीक प्रमाण है। संसद एवं विधानसभाओं में महिला आरक्षण पारित नहीं होने के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं आत्मनिर्भरता और सहभागिता चाहती हैं, इसलिए इस विषय पर राजनीति से ऊपर उठकर उन्हें उनका अधिकार दिलाया जाना चाहिए।
परिसीमन के मुद्दे पर उन्होंने समर्थन जताते हुए कहा कि वर्ष 2011 के बाद जनगणना और लंबे समय से परिसीमन नहीं हुआ है, अतः इसे शीघ्र संपादित किया जाना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि परिसीमन के पश्चात राजस्थान में वर्तमान 200 के स्थान पर 270 विधानसभा क्षेत्र गठित होने की संभावना है। इस संभावित विस्तार को ध्यान में रखते हुए विधायकों के बैठने की व्यवस्था के लिए अभी से तैयारियां प्रारंभ कर दी गई हैं। विधानसभा भवन के चतुर्थ तल पर 280 सीटों वाला नया हॉल तैयार किया जा रहा है तथा संसद की तर्ज पर सेंट्रल हॉल बनाने की योजना भी प्रगति पर है।
देवनानी ने आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि 5 मई को सात राज्यों के विधानसभाध्यक्षों का सेमिनार आयोजित किया जाएगा, जिसमें विभिन्न समितियों की कार्यप्रणाली पर विशेष चर्चा होगी। इस अवसर पर विधानसभा परिसर में हर्बल वाटिका और नक्षत्र वाटिका का लोकार्पण भी किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि अब तक 50 हजार लोग विधानसभा में बने म्यूजियम का अवलोकन कर चुके हैं।
इस बयान और तैयारियों के माध्यम से स्पष्ट संकेत मिलता है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती के साथ-साथ भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए संरचनात्मक और प्रशासनिक स्तर पर ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

Pratahkal Bureau
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