राजस्थान आदिवासी संघ ने मानवाधिकार आयोग में गृहमंत्री के खिलाफ शिकायत दी
संघ ने आदिवासी समुदाय को 'वनवासी' कहे जाने पर आपत्ति जताते हुए संवैधानिक पहचान और गरिमा के उल्लंघन का आरोप लगाया है और सार्वजनिक खेद व्यक्त करने की मांग की है।

राजस्थान आदिवासी संघ के पदाधिकारियों ने जयपुर में राज्य मानवाधिकार आयोग को गृहमंत्री की हालिया टिप्पणी के विरोध में औपचारिक शिकायत पत्र सौंपा है।
जयपुर/झाड़ोल। देश के माननीय गृहमंत्री द्वारा आदिवासी समुदाय को लेकर की गई हालिया विवादित टिप्पणी ने देशभर में आक्रोश की लहर पैदा कर दी है। इस संदर्भ में राजस्थान आदिवासी संघ, जयपुर ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए राज्य मानवाधिकार आयोग, जयपुर को एक औपचारिक शिकायत पत्र सौंपा है। मुख्य कार्यालय 4332, घाटगेट, जयपुर स्थित इस संघ ने अपने प्रदेश उप कार्यालय पगल्याजी, केशरियानी और जिला कार्यालय एकलव्य कॉलोनी, खेड़ा देवी मंदिर सामुदायिक भवन, उदयपुर के माध्यम से झाड़ोल तहसील की फलासिया शाखा की बैठक में लिए गए निर्णयों के आधार पर यह कदम उठाया है।
संघ के पदाधिकारी चंदलाल और तकवशाम ने पत्र में स्पष्ट किया है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत आदिवासी समुदाय को जनजाति के रूप में संवैधानिक मान्यता प्राप्त है। संघ का तर्क है कि गृहमंत्री द्वारा आदिवासी समुदाय को 'वनवासी' कहकर संबोधित करना न केवल उनकी गरिमा और पहचान का अपमान है, बल्कि यह संयुक्त राष्ट्र की 2005 की मूलनिवासी अधिकारों की घोषणा का भी उल्लंघन है। यह कृत्य मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 की धारा 2(1)(d) के अंतर्गत मानवाधिकारों के हनन की श्रेणी में आता है। संघ का मानना है कि इस प्रकार के बयानों से आदिवासी समाज को गहरी मानसिक पीड़ा पहुंची है और इससे सामाजिक तनाव बढ़ रहा है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।
राजस्थान आदिवासी संघ ने मानवाधिकार आयोग से आग्रह किया है कि वे मामले का संज्ञान लेते हुए माननीय गृहमंत्री को निर्देशित करें कि वे आदिवासी समाज से सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त करें। साथ ही, संघ ने मांग की है कि केंद्र और राज्य सरकारों को यह निर्देश जारी किए जाएं कि भविष्य में आदिवासी समुदाय के लिए असंवैधानिक या अनुचित शब्दावली का प्रयोग पूरी तरह प्रतिबंधित हो। संघ ने जोर दिया है कि आदिवासी समुदाय की संवैधानिक पहचान, गरिमा और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए आयोग द्वारा कड़े दिशा-निर्देश जारी किए जाने चाहिए। पत्र के माध्यम से संघ ने आयोग पर पूर्ण विश्वास जताते हुए न्यायोचित कार्यवाही की अपेक्षा की है। यह शिकायत 05 जून 2026 को झाड़ोल से प्रेषित की गई है, जिस पर 9358697434 मोबाइल नंबर के साथ आधिकारिक मुहर और हस्ताक्षर अंकित हैं।

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