राहुल गांधी का बयान 'गैर-जिम्मेदाराना', भाजपा सांसदों ने जताई कड़ी आपत्ति
संसद सत्र के बाद भाजपा सांसदों ने राहुल गांधी के विदेशी मेहमानों से मिलने संबंधी आरोपों को गैर-जिम्मेदाराना करार दिया। सुरक्षा और कूटनीतिक कारणों को आधार बताते हुए भाजपा ने बयान की निंदा की, जबकि विपक्ष-सरकार के बीच राजनीतिक मतभेद स्पष्ट हो गए हैं।

नई दिल्ली: संसद सत्र के बाद उठे बयान ने राजनीतिक गलियारे में हलचल मचा दी। भाजपा सांसदों ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों को गैर-जिम्मेदाराना करार दिया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि भारत सरकार विदेशी मेहमानों को विपक्षी नेताओं से मिलने की अनुमति नहीं देती। इस पर भाजपा सांसदों ने तीखा पलटवार किया।
भाजपा के वरिष्ठ सांसद संबित पात्रा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष के रूप में राहुल गांधी का यह बयान तथ्यों पर आधारित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय विशिष्ट व्यक्तियों को नेता प्रतिपक्ष से मिलने की अनुमति न देने का निर्णय सुरक्षा कारणों से लिया जाता है। पात्रा ने कहा, "भारत सरकार राहुल गांधी से क्यों असुरक्षित महसूस करेगी? आज भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बन चुका है।" उन्होंने आगे बताया कि जब भी विपक्षी नेता विदेश यात्रा पर जाते हैं, हमारी सरकार संबंधित देशों के नेताओं से अनुरोध करती है कि वे उनसे व्यक्तिगत तौर पर न मिलें।
भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी ने इस बयान को हास्यास्पद बताते हुए कहा कि राहुल गांधी को आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति से ऊपर उठकर जनता के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा, "रूस के राष्ट्रपति भारत आ रहे हैं, ऐसे समय में विपक्ष के नेता को उनका सम्मानपूर्वक स्वागत करना चाहिए। नेगेटिव सोच और विवादास्पद बयान देना उचित नहीं है।"
वहीं भाजपा सांसद नरहरि अमीन ने कहा कि राहुल गांधी को यह सोचना चाहिए कि विदेश जाते समय भारत की आलोचना करना कैसे सही ठहर सकता है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मुद्दों पर देश में खुली बहस होनी चाहिए, लेकिन विदेश यात्रा के दौरान भारत सरकार या देश की छवि को नुकसान पहुंचाना स्वीकार्य नहीं है। अमीन ने कांग्रेस के दौर की तुलना करते हुए कहा कि तब विपक्षी सदस्य अक्सर सरकार के पक्ष में खड़े होते थे, जबकि वर्तमान में कुछ बयान विवादित बन जाते हैं।
राजनीतिक गलियारे में इस बयान को लेकर जारी प्रतिक्रियाओं से साफ है कि विपक्ष और सरकार के बीच कूटनीतिक और सुरक्षा संवेदनाओं को लेकर मतभेद गहराए हैं। इस विवाद का असर आने वाले दिनों में राजनीतिक संवाद और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों से संबंधित बैठकों पर भी पड़ सकता है।
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