सेवा के 36 वर्षों की तपस्या, विदाई में छलके आंसू: प्रधानाचार्य मोहनलाल स्वर्णकार को ऐतिहासिक विदाई
फतहनगर के चंगेडी विद्यालय में प्रधानाचार्य मोहनलाल स्वर्णकार की 36 वर्षों की सेवा के बाद हुई ऐतिहासिक विदाई। नम आंखों से ग्रामीणों ने दी विदाई, विद्यालय को दिए 50 हजार रुपये। देखिए कैसे एक शिक्षक ने गांव के दिलों में बनाई अपनी खास जगह।

प्रधानाचार्य मोहनलाल स्वर्णकार की सेवानिवृत्ति के अवसर पर विद्यालय परिसर में आयोजित विदाई समारोह के दौरान उपस्थित शिक्षक, स्टाफ और ग्रामीण।
फतहनगर। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, चंगेडी के प्रधानाचार्य मोहनलाल स्वर्णकार की सेवानिवृत्ति के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम ने भावनाओं और जनसहभागिता का एक ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया, जिसे क्षेत्र लंबे समय तक याद रखेगा। 36 वर्षों की गौरवपूर्ण शैक्षिक सेवा पूर्ण करने के उपरांत आयोजित इस विदाई समारोह में पूरा गांव उमड़ पड़ा और प्रधानाचार्य के विदा होते देख हर किसी की आंखें नम दिखाई दीं।
प्रधानाचार्य स्वर्णकार ने अपने लंबे सेवाकाल का अधिकांश समय चंगेड़ी विद्यालय में बिताया। इस दौरान उन्होंने केवल विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि विद्यालय के समग्र विकास और अनुशासित शैक्षिक वातावरण के निर्माण पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया। उनके प्रयासों के फलस्वरूप विद्यालय ने शिक्षा के साथ-साथ भौतिक संसाधनों के विकास में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की, जिसके कारण वे विद्यार्थियों, अभिभावकों और ग्रामीणों के बीच अत्यंत लोकप्रिय हो गए।
विदाई के अवसर पर निकाला गया जुलूस पूरे गांव के लिए एक भावुक पल बन गया। जब यह जुलूस गांव की गलियों से गुजरा, तो ग्रामीणों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। महिलाओं, बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों ने अपने प्रिय प्रधानाचार्य का आत्मीय सम्मान किया। कई ग्रामीण अपने आंसू नहीं रोक सके और वातावरण पूर्णतः भावुक हो उठा। उपस्थित लोगों का मानना था कि गांव में इस प्रकार का भव्य और जनसहभागिता से भरपूर विदाई समारोह पहली बार देखने को मिला है।
समारोह में वक्ताओं ने प्रधानाचार्य स्वर्णकार के कार्यकाल को विद्यालय के लिए स्वर्णिम अध्याय बताते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षा को सेवा का माध्यम मानकर कार्य किया। उनके द्वारा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, अनुशासन, संस्कार और विद्यालय के भौतिक उन्नयन में दिए गए योगदान को सदैव याद किया जाएगा। अपने विदाई संबोधन में मोहनलाल स्वर्णकार ने विद्यार्थियों को मेहनत, अनुशासन और अच्छे संस्कारों के साथ जीवन में आगे बढ़ने का संदेश दिया। उन्होंने विद्यालय परिवार, ग्रामीणों और अभिभावकों द्वारा मिले प्रेम एवं सम्मान के लिए भावुक होकर आभार व्यक्त किया।
सेवानिवृत्ति के अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों के लिए स्नेह भोज का आयोजन कराया। साथ ही, विद्यालय के विकास कार्यों के लिए 50 हजार रुपये की सहयोग राशि प्रदान कर शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का एक और उदाहरण प्रस्तुत किया, जिसकी सभी ने मुक्तकंठ से सराहना की। कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के अधिकारियों, विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्यों, शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों, समाज के प्रबुद्ध नागरिकों, परिवार जनों तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। विद्यालय स्टाफ ने अभिनंदन पत्र, शॉल, माल्यार्पण एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर उन्हें भावभीनी विदाई दी। प्रधानाचार्य मोहनलाल स्वर्णकार की यह विदाई एक शिक्षक के प्रति समाज की कृतज्ञता का उत्सव बन गई, जिन्होंने 36 वर्षों तक शिक्षा को अपना सर्वोच्च धर्म माना।

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