करनाउवा में महिला किसानों को प्राकृतिक खेती व सूक्ष्म सिंचाई का प्रशिक्षण, टिकाऊ कृषि अपनाने का लिया संकल्प
खेरवाड़ा के करनाउवा में महिला किसानों को प्राकृतिक खेती, जीवामृत, नीमास्त्र और सूक्ष्म सिंचाई का प्रशिक्षण दिया गया। जानिए कार्यक्रम की प्रमुख बातें।

तस्वीर में खेरवाड़ा के करनाउवा गांव में प्राकृतिक खेती और सूक्ष्म सिंचाई विषय पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान ग्रामीण महिलाएं और बच्चे पोस्टर व पौधों के साथ खड़े नजर आ रहे हैं।
खेरवाड़ा के ग्राम करनाउवा में सेंटर फॉर माइक्रोफाइनेंस (सीएमएफ) संस्था ने कोटक महिंद्रा बैंक लिमिटेड (केएमबीएल) के सहयोग से महिला किसानों के लिए प्राकृतिक खेती एवं सूक्ष्म सिंचाई विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। प्रशिक्षण का उद्देश्य कम लागत, पर्यावरण-अनुकूल एवं जलवायु परिवर्तन के अनुरूप कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना तथा जल संरक्षण के प्रति किसानों को जागरूक करना था।
प्रशिक्षण के दौरान कृषि विशेषज्ञों ने प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों और व्यवहारिक पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने जीवामृत और नीमास्त्र तैयार करने की विधि, उनके उपयोग तथा फसलों पर होने वाले सकारात्मक प्रभावों से किसानों को अवगत कराया। विशेषज्ञों ने बताया कि इन प्राकृतिक घोलों के नियमित उपयोग से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटती है और उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार होता है।
कार्यक्रम में ड्रिप (बूंद-बूंद) एवं स्प्रिंकलर (फव्वारा) सिंचाई प्रणालियों के महत्व पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। किसानों को बताया गया कि ड्रिप सिंचाई से 40 से 60 प्रतिशत तक पानी की बचत संभव है। इसके साथ ही फसलों को आवश्यक मात्रा में पानी और पोषक तत्व मिलने से बेहतर उत्पादन प्राप्त होता है। प्रशिक्षण में कवर क्रॉप (आवरण फसल) के लाभ भी बताए गए तथा मिट्टी संरक्षण, नमी बनाए रखने और खरपतवार नियंत्रण में इसकी उपयोगिता समझाई गई।
कृषि विशेषज्ञ गजानंद सूर्यवंशी ने प्राकृतिक खेती की विभिन्न तकनीकों का व्यवहारिक प्रदर्शन करते हुए महिला किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती लागत कम करने के साथ मिट्टी, जल, पर्यावरण एवं मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा का प्रभावी माध्यम है और स्थानीय संसाधनों के उपयोग से टिकाऊ कृषि को बढ़ावा दिया जा सकता है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में एडविन फ्रांसिस, महावीर प्रजापति, नरेश अहारी सहित संस्था के फील्ड स्टाफ ने सहयोग करते हुए किसानों को सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों एवं विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दी। कार्यक्रम के अंत में महिला किसानों ने प्राकृतिक खेती, जीवामृत, नीमास्त्र तथा सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों को अपने खेतों में अपनाने का संकल्प लिया। संस्था ने भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर किसानों को नवीन एवं टिकाऊ कृषि तकनीकों से जोड़ने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

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