मावली-खेमली शारीरिक शिक्षकों की वाकपीठ में खेल नवाचारों और वरिष्ठता मुद्दों पर मंथन
मावली-खेमली शारीरिक शिक्षकों की वाक्पीठ में खेल नवाचार, वरिष्ठता विवाद और जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं को लेकर अहम चर्चा हुई।

तस्वीर में मावली और खेमली ब्लॉक की संयुक्त सत्रारम्भ वाकपीठ बैठक में मंच पर बैठे अतिथि और शारीरिक शिक्षक नजर आ रहे हैं।
मावली व खेमली ब्लॉक के प्रारंभिक शिक्षा के शारीरिक शिक्षकों की सत्र 2026-27 की एक दिवसीय ब्लॉक स्तरीय संयुक्त सत्रारम्भ वाकपीठ शनिवार को मावली तहसील के राउप्रावि आकोदड़ा (आमली) के तत्वावधान में राणेरा महादेव मंदिर परिसर में आयोजित की गई। कार्यक्रम में शिक्षा, खेल गतिविधियों और शारीरिक शिक्षकों से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक मुख्यालय दुर्गेश मेनारिया थे, जबकि अध्यक्षता उप जिला शिक्षा अधिकारी (शारीरिक शिक्षा) लक्ष्मण दास वैष्णव ने की। अति विशिष्ट अतिथि अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (विद्यालय शिक्षा) के उदयपुर जिलाध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह झाला, संभाग संगठन मंत्री राजेंद्र सिंह सारंगदेवोत और उपाध्यक्ष शैलेश कोठारी रहे।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में शारीरिक शिक्षक संघ के प्रदेश महामंत्री डॉ. भेरू सिंह राठौड़, वाक्पीठ के जिलाध्यक्ष विजय लाल मेनारिया, जिला सचिव जगन्नाथ सिंह चुंडावत, उपाध्यक्ष प्रवीण जैन, शारीरिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष गोवर्धन सिंह झाला, प्रबोधक संघ एवं एकीकृत महासंघ के जिलाध्यक्ष दिलीप सिंह सारंगदेवोत, प्रारंभिक जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय खेल अनुभाग के प्रभारी युगल किशोर शर्मा, सीबीईओ कार्यालय मावली के संदर्भ व्यक्ति व प्रतिनिधि लक्ष्मीलाल जाट, खेमपुर पीईईओ जगदीश पालीवाल, उप्रावि प्रधानाध्यापक वाक्पीठ मावली के अध्यक्ष योगेश मारवाड़ी, शारीरिक शिक्षक संघ के संरक्षक हीरालाल सुथार और दिलीप त्रिपाठी सहित अन्य उपस्थित रहे।
पंचायत प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी रामचंद्र रेगर ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत किया। राउप्रावि आकोदड़ा के शारीरिक शिक्षक शांतिलाल जाट ने सभी का धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन जिला मीडिया प्रभारी गोपाल लाल मेहता ने किया।
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन कर की गई। इसके बाद मावली ब्लॉक अध्यक्ष अब्दुल गनी व सचिन राधा कृष्ण मेनारिया तथा खेमली ब्लॉक अध्यक्ष अर्जुन सिंह चुंडावत व सचिन कैलाश जोशी के नेतृत्व में सभी अतिथियों का तिलक एवं उपर्णा से स्वागत अभिनंदन किया गया।
प्रथम सत्र में वार्ताकार प्रकाश जगरवाल ने वॉलीबॉल, हुक्मीचंद मेनारिया ने खो-खो और घनश्याम मेघवाल ने क्रिकेट पर अपनी वार्ता प्रस्तुत की। वक्ताओं ने खेलों में हुए विभिन्न नवाचारों से उपस्थित शारीरिक शिक्षकों को अवगत कराया।
इस अवसर पर शारीरिक शिक्षकों ने जिला शिक्षा अधिकारी को अवगत कराया कि कई उच्च प्राथमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक एवं प्रिंसिपल द्वारा स्टाफ उपस्थिति पंजिका में अध्यापकों के नाम दर्ज करने में वरिष्ठता के मापदंड का पालन नहीं किया जा रहा है। शिक्षकों ने बताया कि समान वेतन श्रंखला में वरिष्ठ होने के बावजूद शारीरिक शिक्षकों का नाम उपस्थिति पंजिका में अंत में लिखा जा रहा है, जो उनके लिए अपमानजनक है। इसको लेकर शारीरिक शिक्षकों में नाराजगी जताते हुए वरिष्ठता के नियमों के पालन संबंधी आदेश जारी करने की मांग की गई।
जिला मीडिया प्रभारी गोपाल मेहता ने बताया कि शिक्षा विभाग से इसी सत्र में सेवानिवृत होने वाले रतनलाल घावरी, मनोहर सिंह राठौड़, धनराज जाट और सुरेंद्र सिंह झाला का वाक्पीठ कार्यकारिणी की ओर से शॉल एवं पाग धारण करवाकर अभिनंदन किया गया।
वाक्पीठ जिलाध्यक्ष विजय लाल मेनारिया ने बताया कि प्राथमिक स्कूलों की जिला स्तरीय प्रतियोगिता आयोजित करवाने के प्रस्ताव को स्वीकार करने पर राप्रावि बीड़घास के प्रधानाध्यापक शैलेश कोठारी तथा 14, 17 व 19 वर्ष की छात्रा वर्ग की खो-खो प्रतियोगिता का इस सत्र में आयोजन करवाने के प्रस्ताव को स्वीकार करने पर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बड़ागांव के शारीरिक शिक्षक गोपीलाल मेनारिया का सम्मान किया गया। इसके साथ ही उत्कृष्ट कार्यों के लिए शारीरिक शिक्षक गिरिराज मेनारिया और जिला मीडिया प्रभारी गोपाल मेहता को अतिथियों के हाथों सम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक दुर्गेश मेनारिया ने अपने उद्बोधन में कहा कि कुदरत ने बालकों में सभी प्रकार की खूबियां दी हैं। शिक्षकों और शारीरिक शिक्षकों का काम उनकी अनावश्यक आदतों को हटाकर बालक-बालिकाओं को तराशना है। उन्होंने सभी शारीरिक शिक्षकों से कहा कि जिस विद्यालय में शारीरिक शिक्षक नियुक्त है, उस विद्यालय से किसी भी एक खेल में जिला स्तरीय प्रतियोगिता में टीम का अनिवार्य रूप से भाग लेना चाहिए।
कार्यक्रम में खेल शिक्षा को मजबूत करने, विद्यार्थियों की प्रतिभाओं को निखारने और विद्यालय स्तर पर खेल सहभागिता बढ़ाने को लेकर शारीरिक शिक्षकों ने अपने विचार रखे।

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