पेंशनर्स के विरुद्ध 'वैद्यता अधिनियम 2025' के विरोध में झाड़ोल में काला दिवस
राजस्थान पेंशनर समाज ने वित्त मंत्रालय के नए नियमों को बताया भेदभावपूर्ण, आठवें वेतन आयोग में समानता और अधिनियम वापस लेने की उठाई मांग।

झाड़ोल तहसील परिसर में 25 मार्च 2026 को 'वैद्यता अधिनियम 2025' के विरोध में काला दिवस मनाते राजस्थान पेंशनर समाज के सदस्य और पदाधिकारी।
झाड़ोल (फ.), उदयपुर। राजस्थान पेंशनर समाज, उपशाखा झाड़ोल (फ.) जिला-उदयपुर द्वारा आज 25 मार्च 2026 को केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा पेंशनर्स के विरुद्ध जारी 'वैद्यता अधिनियम 2025' को वापस लेने की मांग को लेकर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया गया। तहसील परिसर स्थित कार्यालय पेंशन कक्ष से एकजुट होकर पेंशनभोगियों ने अखिल भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ, दिल्ली के आह्वान पर इस दिन को "काला दिवस" के रूप में मनाया। अध्यक्ष नारायणलाल पुजारी (कोल्यारी, मो: 9571881455) एवं मंत्री मगनलाल जोशी (मगवास, मो: 9784176387) के नेतृत्व में पेंशनरों ने उप खण्ड अधिकारी और तहसीलदार के माध्यम से माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन प्रेषित किया।
वित्त विधेयक के माध्यम से लागू अधिनियम पर गहरी आपत्ति
राजस्थान पेंशनर समाज ने ज्ञापन के माध्यम से प्रधानमंत्री का ध्यान आकृष्ट करते हुए बताया कि एक ऐसा अधिनियम, जो इस सिद्धांत को मान्यता देता है कि केंद्र सरकार को अपने पेंशनर्स का वर्गीकरण करने और उनके बीच अंतर बनाये रखने का अधिकार है, वह 29 मार्च 2025 से प्रभावी हो गया है। पेंशनरों का आरोप है कि इसे बिना किसी पूर्व सूचना के वित्त विधेयक के भाग के रूप में पेश किया गया और 25 मार्च 2025 को लोकसभा द्वारा अनुमोदित कर दिया गया। यदि यह अधिनियम अक्षरशः लागू होता है तो पेंशनभोगियों की सेवानिवृत्ति की तिथि, पेंशन पात्रता के संबंध में वर्गीकरण और उनके बीच अन्तर का आधार होगा, जिससे केन्द्रीय वेतन आयोग के कार्यकाल से पहले के पेंशनर्स वेतन आयोग की सिफारिशों के लाभ से वंचित हो जाएगें। ### सर्वोच्च न्यायालय के 'नाकरा फैसले' का दिया हवाला
ज्ञापन में इस बात पर जोर दिया गया कि यह अधिनियम सरकार के उन घोषित उद्देश्यों के विरुद्ध है जहाँ वह नागरिकों को सामाजिक न्याय और सुरक्षा प्रदान करने का दावा करती है। यह कदम भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायिक निर्णयों के भी विपरीत है। प्रदर्शनकारियों ने न्यायमूर्ति चन्द्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पाँच सदस्यीय संविधान पीठ द्वारा डी.एस. नाकरा और अन्य बनाम भारत संघ मामले (सिविल याचिका संख्या 5939-41/1980) में दिए गए ऐतिहासिक फैसले को उद्धृत करते हुए कहा कि— "पेंशन एक सामाजिक कल्याणकारी व्यवस्था है, जो उन लोगों को सामाजिक-आर्थिक न्याय प्रदान करती है, जिन्होंने अपने जीवन के सुनहरे दिनों में नियोक्ता (केन्द्र/राज्य सरकार) के लिए अथक परिश्रम किया है, इस आश्वासन के साथ कि वृद्धावस्था में उन्हें बेसहारा नहीं छोडा जाएगा।"
आठवें वेतन आयोग और समानता की मांग
पेंशनर समाज के अनुसार, यह अधिनियम 01-01-2026 से पहले सेवानिवृत्त हुए मौजूदा पेंशनरों को अपूरणीय क्षति पहुँचाता है। उन्होंने मांग की है कि जिस प्रकार सातवें केन्द्रीय वेतन आयोग द्वारा 01-01-2016 से पहले और बाद में सेवानिवृत्त हुए पेंशनरों के बीच समानता की सिफारिश की गई थी, जिसे सरकार ने स्वीकार भी किया था, उसी प्रकार आठवें केन्द्रीय वेतन आयोग में भी इस सिद्धान्त को यथावत रखा जावे। वित्त विधेयक के रूप में यह काला अधिनियम लोकसभा में 25 मार्च 2025 को पारित हुआ था जिसे जारी हुए आज एक वर्ष पूरा हो रहा है, जिसके विरोध में पूरे भारतवर्ष के समस्त राज्यों में आज काला दिवस मनाया जा रहा है।
तत्काल प्रभाव से अधिनियम वापसी की अपील
अन्त में, राजस्थान पेंशनर समाज झाड़ोल ने स्पष्ट किया कि यह कदम इस कुख्यात अधिनियम के कारण उत्पन्न परेशानियों की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए उठाया गया है। उन्होंने अनुरोध किया है कि— "केन्द्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम अधिनियम को वापस लेने के लिए तत्काल कदम उठाए जावें ताकि पेंशनर समुदाय को राहत मिल सके।" इस ज्ञापन के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय पेंशनभोगी उपस्थित रहे और अपनी एकजुटता प्रदर्शित की।

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