पलाना कलां गांव की चारागाह भूमि पर अवैध कब्जों का दंश झेल रहे ग्रामीणों का आक्रोश अब प्रशासन की चौखट तक पहुंच गया है। शनिवार को सिंदु में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर में पहुंचे ग्रामीणों ने उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर इस लंबे समय से चले आ रहे अतिक्रमण को अविलंब हटाने की पुरजोर मांग की है। यह मामला न केवल सरकारी भूमि के दुरुपयोग से जुड़ा है, बल्कि स्थानीय पशुपालकों के अस्तित्व और सड़क सुरक्षा के लिहाज से भी अत्यंत गंभीर बना हुआ है।

ग्रामीणों का आरोप है कि पलाना कलां स्थित चारागाह भूमि पर कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों ने अवैध कब्जा जमा रखा है, जिसके कारण पशुओं के चरने के लिए कोई सुरक्षित स्थान शेष नहीं बचा है। ग्रामीणों ने इस संदर्भ में पूर्व में भी तहसील प्रशासन को कई बार लिखित शिकायतें और ज्ञापन सौंपे थे, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर प्रभावी कार्रवाई के अभाव में अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हैं और स्थिति यथावत बनी हुई है।

ज्ञापन में सबसे चिंताजनक पहलू यह उजागर किया गया है कि उक्त चारागाह भूमि पर एक अवैध फैक्ट्री का संचालन भी किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, गांव के मुख्य मार्ग के निकट किए गए अतिक्रमण के कारण सड़क पर आवागमन के दौरान दृश्यता कम हो जाती है, जिससे वहां आए दिन गंभीर दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से व्यक्त किया है कि अतिक्रमण के कारण जहां एक ओर पशुपालकों की आजीविका प्रभावित हो रही है, वहीं दूसरी ओर आम नागरिकों की सुरक्षा पर भी संकट गहरा गया है।

मावली के उपखंड अधिकारी रमेश सीरवी को सौंपे गए इस ज्ञापन में ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए सरकारी भूमि को मुक्त कराने का आग्रह किया है। पलाना कलां के अनेक ग्रामीणों के हस्ताक्षरयुक्त इस ज्ञापन में दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई करने की पुरजोर मांग की गई है। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन इस बार अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध ठोस कदम उठाता है या फिर ग्रामीणों की यह गुहार एक बार फिर फाइलों में दबकर रह जाएगी। पलाना कलां की यह समस्या अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।

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