मावली के पलाना कलां में हनुमान मंदिर के पास सरकारी भूमि पर हुए अतिक्रमण को लेकर विकास अधिकारी ने सख्त कदम उठाए हैं। जेसीबी से अवैध ढांचों को हटाने के निर्देश दिए गए।

मावली तहसील के पलाना कलां ग्राम पंचायत में सार्वजनिक भूमि पर पुनः अतिक्रमण का प्रयास प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है। हनुमान मंदिर के समीप स्थित आबादी भूमि, जिसे पूर्व में कड़ी मशक्कत के बाद अतिक्रमण मुक्त कराया गया था, पर दोबारा कब्जे की सूचना ने स्थानीय प्रशासन को हरकत में ला दिया है। इस संवेदनशील मामले पर संज्ञान लेते हुए पंचायत समिति के विकास अधिकारी शेलेन्द्र खींची ने त्वरित कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।

घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब स्थानीय निवासी महेन्द्र जाट ने प्रशासन को सूचित किया कि ग्राम पंचायत क्षेत्र में स्थित सार्वजनिक आबादी भूमि पर कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा पुनः अनाधिकृत रूप से कब्जा किया जा रहा है। शिकायत में स्पष्ट किया गया कि मंदिर के समीप की जिस भूमि को पूर्व में अतिक्रमण से मुक्त करवाया गया था, वहां फिर से निर्माण कार्य और कब्जे की कोशिशें शुरू हो गई हैं। सार्वजनिक संपत्ति के इस दोहन को लेकर ग्रामीणों में व्याप्त रोष और शिकायत को गंभीरता से लेते हुए विकास अधिकारी ने ग्राम विकास अधिकारी एवं प्रशासक को निर्देशित किया है कि मौके पर चल रहे अतिक्रमण को तत्काल प्रभाव से रुकवाया जाए।

प्रशासनिक आदेशों के अनुसार, उक्त भूमि पर किए गए किसी भी प्रकार के निर्माण को जेसीबी की सहायता से अविलंब ध्वस्त करने को कहा गया है। स्थिति की संवेदनशीलता को भांपते हुए विकास अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कार्रवाई के दौरान किसी प्रकार का प्रतिरोध उत्पन्न होता है, तो मावली उपखंड अधिकारी से पुलिस जाब्ता मांगकर बलपूर्वक अतिक्रमण मुक्त कराने की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए। प्रशासन की इस सक्रियता ने उन लोगों में खलबली मचा दी है, जो सार्वजनिक भूमि पर अपनी पैठ जमाने की फिराक में थे।

अब संपूर्ण पलाना कलां के ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। यह मामला न केवल सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा का है, बल्कि सरकारी आदेशों की अवहेलना करने वालों के लिए एक सख्त संदेश भी है। क्या प्रशासन इस बार अतिक्रमणकारियों पर स्थाई नकेल कस पाएगा, यह आने वाला समय ही स्पष्ट करेगा। फिलहाल, स्थानीय निवासियों को उम्मीद है कि सरकारी भूमि पुनः अतिक्रमण मुक्त होगी और सार्वजनिक हित सुरक्षित रहेगा।

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