पलाना कलां: पिता की स्मृति में उमड़ा सेवा का दरिया, भामाशाह विजय खटीक ने 200 नौनिहालों को भेंट किए स्वेटर
पलाना कलां में भामाशाह विजय खटीक ने अपने दिवंगत पिता स्वर्गीय पारसमल खटीक की स्मृति में मानवता की मिसाल पेश की। क्षेत्र के उनावरा, कुमारिया, निम्बाड़ा डांग और काड़ा स्थित राजकीय विद्यालयों के 200 जरूरतमंद बच्चों को स्वेटर वितरित कर उन्हें कड़ाके की ठंड से राहत दिलाई गई। पुलिस ड्यूटी के दौरान शहीद हुए पिता की सेवा भावना को आगे बढ़ाते इस पुनीत कार्य की क्षेत्रवासियों ने सराहना की।

पलाना कलां। कड़ाके की ठंड और ठिठुरती रातों के बीच जब मानवता की सेवा के हाथ आगे बढ़ते हैं, तो वह न केवल शरीर को बल्कि मन को भी सुकून पहुंचाते हैं। पलाना कलां क्षेत्र में गुरुवार को एक ऐसा ही हृदयस्पर्शी दृश्य देखने को मिला, जहाँ सेवा और समर्पण की मिसाल पेश करते हुए भामाशाह विजय खटीक ने अभावों में जीवन जी रहे मासूम बच्चों के चेहरों पर मुस्कान बिखेरी। अपने सामाजिक सरोकारों को निभाते हुए विजय खटीक ने क्षेत्र के विभिन्न सरकारी विद्यालयों के करीब 200 जरूरतमंद बच्चों को स्वेटर वितरित किए, ताकि शीत लहर के इस दौर में शिक्षा की लौ जलाने वाले इन नौनिहालों को कड़कड़ाती ठंड से राहत मिल सके।
इस पुनीत कार्य का आगाज़ पलाना कलां क्षेत्र के राजकीय प्राथमिक विद्यालय उनावरा से हुआ, जिसके बाद राजकीय प्राथमिक विद्यालय कुमारिया, राजकीय प्राथमिक विद्यालय निम्बाड़ा डांग और राजकीय प्राथमिक विद्यालय काड़ा में स्वेटर वितरण का सिलसिला जारी रहा। इतना ही नहीं, विद्यालयों के अलावा रास्ते में मिलने वाले अन्य जरूरतमंद बच्चों को भी जब भामाशाह ने अपने हाथों से गर्म कपड़े पहनाए, तो उनकी आंखों में कृतज्ञता के भाव साफ झलक रहे थे। इस संपूर्ण आयोजन के पीछे एक गहरी भावनात्मक प्रेरणा छिपी थी। भामाशाह विजय खटीक ने भावुक होते हुए बताया कि उनके पिता स्वर्गीय पारसमल खटीक, जिनका राजसमंद में पुलिस ड्यूटी के दौरान दुःखद निधन हो गया था, सदैव गरीबों और असहायों की मदद के लिए तत्पर रहते थे। आज पिता की उसी गौरवशाली विरासत और स्मृतियों को जीवित रखने के उद्देश्य से उन्होंने इस सेवा कार्य को अंजाम दिया है।
गौरतलब है कि विजय खटीक का यह सेवा भाव केवल एक दिन का प्रयास नहीं है, बल्कि वे प्रतिवर्ष शीत ऋतु में समाज के वंचित वर्ग के लिए स्वेटर, जूते और कंबल वितरण का अभियान चलाते हैं। उनके इस निस्वार्थ योगदान की स्थानीय ग्रामीणों और विद्यालय स्टाफ द्वारा मुक्तकंठ से सराहना की गई। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय प्रशासन की ओर से भामाशाह का साफा और उपरणा पहनाकर आत्मीय स्वागत किया गया। यह आयोजन न केवल एक वितरण कार्यक्रम था, बल्कि समाज के संपन्न वर्ग के लिए एक संदेश भी था कि यदि नेक इरादे हों, तो पूर्वजों की स्मृतियों को जनकल्याण के माध्यम से अमर बनाया जा सकता है।

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