डोडा-चूरा नष्टीकरण पर किसान संघ का विरोध, ₹2000 प्रति किलो मुआवजे तक आदेश स्थगित करने की मांग
खेरोदा में भारतीय किसान संघ (चित्तौड़ प्रांत) के प्रतिनिधिमंडल ने आबकारी आयुक्त नमित मेहता से मिलकर डोडा-चूरा नष्टीकरण के आदेश स्थगित करने और ₹2,000 प्रति किलो मुआवजे की मांग उठाई। किसानों ने व्यावहारिक समस्याओं के साथ खेत में हकाई की अनुमति देने का भी आग्रह किया।

आबकारी आयुक्त नमित मेहता को ज्ञापन सौंपते भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधिमंडल के सदस्य।
खेरोदा, 16-07-2026। भारतीय किसान संघ (चित्तौड़ प्रांत) के एक प्रतिनिधिमंडल ने आबकारी आयुक्त नमित मेहता से मुलाकात कर अफीम उत्पादक किसानों की विभिन्न समस्याओं, विशेष रूप से डोडा-चूरा के नष्टीकरण और उसके मुआवजे के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल ने राज्य सरकार से मांग की कि जब तक किसानों को डोडा-चूरा का ₹2,000 प्रति किलो की दर से मुआवजा नहीं दिया जाता, तब तक इसके नष्टीकरण के आदेश को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाए।
किसान प्रतिनिधियों ने आबकारी आयुक्त को बताया कि भारत सरकार किसानों को जीवन रक्षक दवाइयों के निर्माण के लिए अफीम उत्पादन का लाइसेंस प्रदान करती है। निर्धारित मापदंडों के अनुसार केंद्र सरकार किसानों से अफीम खरीद लेती है, लेकिन उसके बाद बचा हुआ डोडा-चूरा किसानों के लिए गंभीर समस्या बन जाता है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 से पहले राज्य सरकार निर्धारित ठेका पद्धति के तहत डोडा-चूरा को ₹125 प्रति किलो की दर से खरीदती थी, लेकिन बाद में इस व्यवस्था को बंद कर दिया गया। वर्तमान में किसानों को इस डोडा-चूरा को जमींदोज (नष्ट) करने के आदेश दिए गए हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
प्रतिनिधिमंडल ने व्यावहारिक कठिनाइयों का भी उल्लेख किया। किसानों का कहना था कि क्षेत्र में अनेक किसानों के मकान कच्चे हैं, जहां डोडा-चूरा को सुरक्षित रखना बेहद कठिन है। कई बार मवेशी इसे खा जाते हैं, जबकि बारिश के दौरान पानी में भीगने से यह खराब हो जाता है। ऐसी परिस्थितियों में निर्धारित मापदंडों के अनुरूप इसका सुरक्षित भंडारण करना किसानों के लिए संभव नहीं रह जाता।
भारतीय किसान संघ ने मांग रखी कि या तो सरकार किसानों को डोडा-चूरा के वजन के अनुसार ₹2,000 प्रति किलो का मुआवजा प्रदान करे या फिर किसानों पर विश्वास करते हुए उन्हें अपने ही खेत में हकाई (ट्रैक्टर चलाकर) के माध्यम से इसे नष्ट करने की अनुमति दी जाए। किसानों ने इसके लिए स्व-घोषित प्रमाण पत्र देने की भी बात कही। उनका कहना है कि ऐसा करने से भूमि की उर्वरता बढ़ेगी, जैविक खेती को प्रोत्साहन मिलेगा और किसानों का शोषण भी रुकेगा। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि मुआवजा मिलने के बाद सभी किसान डोडा-चूरा के नष्टीकरण के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
आबकारी आयुक्त से हुई इस मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल में प्रांत अफीम आयाम प्रमुख/अध्यक्ष बद्री लाल तेली, संभाग उपाध्यक्ष छगनलाल जाट, उदयपुर जिला मंत्री भरत कुमावत, वल्लभनगर तहसील अध्यक्ष दुर्गा शंकर, कानोड़ तहसील अध्यक्ष नर्मदा शंकर मेनारिया, मांगीलाल सिंघावत, जगदीश प्रसाद मेनारिया, पुरुषोत्तम रूपावत और अंबालाल कानावत सहित कई किसान प्रतिनिधि शामिल रहे। प्रतिनिधिमंडल ने आबकारी आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर किसानों की मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने का आग्रह किया।

Budhi prakash parashar (Udaipur)
नाम: बुद्धि प्रकाश पाराशर
वर्तमान पद: सीनियर पत्रकार (प्रातःकाल)
कार्यक्षेत्र: कस्बा खेरोदा (तहसील: भींडर, जिला: उदयपुर, राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, शिक्षा, प्रशासन, स्वास्थ्य एवं अन्य स्थानीय समाचार
परिचय
बुद्धि प्रकाश पाराशर राजस्थान के उदयपुर जिले के खेरोदा क्षेत्र के एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। वह मुख्य रूप से कस्बा खेरोदा, भींडर तहसील और आसपास के ग्रामीण व शहरी इलाकों को कवर करते हैं। उनके कार्यक्षेत्र में स्थानीय राजनीति, कानून-व्यवस्था (क्राइम), शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन और जनहित से जुड़े सभी मुख्य विषय शामिल हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
बुद्धि प्रकाश पाराशर जी को मीडिया क्षेत्र में 30 साल का लंबा और व्यापक अनुभव है:
- वह साल 2000 से लगातार 'प्रातःकाल' समाचार पत्र से जुड़े हुए हैं।
- उन्हें 'राजस्थान पत्रिका' के साथ भी काम करने का लंबा अनुभव रहा है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी शिक्षा स्नातक (Graduate) स्तर तक पूरी की है।
