सिक्किम के राज्यपाल ओमप्रकाश माथुर ने रविवार को उदयपुर प्रवास के दौरान अपने राजनीतिक जीवन के पुराने साथियों पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश मेघवाल और भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष मदनलाल मूंदड़ा के निवास पर पहुंचकर मुलाकात की। इस दौरान दशकों पुराने राजनीतिक और संगठनात्मक जीवन की स्मृतियां ताजा हुईं तथा जनसंघ से भाजपा तक के संघर्षपूर्ण सफर को याद किया गया।

राज्यपाल माथुर ने सबसे पहले अम्बावगढ़ स्थित कैलाश मेघवाल के निवास पर पहुंचकर उनकी कुशलक्षेम जानी। इसके बाद उन्होंने गणेशनगर स्थित मदनलाल मूंदड़ा के निवास पर जाकर उनसे मुलाकात की। तीनों नेता आपातकाल के दौरान जेल जाने वाले लोकतंत्र सेनानी रहे हैं। मुलाकात के दौरान आपातकाल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और जनसंघ के दौर के अनेक संस्मरण साझा किए गए।

मदनलाल मूंदड़ा से चर्चा करते हुए राज्यपाल माथुर ने संघ और जनसंघ के समय की गतिविधियों तथा संगठन विस्तार से जुड़ी स्मृतियों को याद किया। वहीं कैलाश मेघवाल ने बातचीत के दौरान कहा कि जालोर लोकसभा क्षेत्र में तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री बूटासिंह के विरुद्ध हुए चुनाव में उनकी ऐतिहासिक विजय के प्रमुख रणनीतिकार ओमप्रकाश माथुर ही थे। उन्होंने कहा कि इसी जीत के बाद उन्हें “जायंट किलर” की उपाधि प्राप्त हुई थी।

मेघवाल ने इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक स्वर्गीय लक्ष्मणसिंह शेखावत (भैय्याजी) को भी स्मरण किया। उन्होंने कहा कि लक्ष्मणसिंह शेखावत और ओमप्रकाश माथुर ने उन्हें राजनीतिक एवं संगठनात्मक जीवन में आगे बढ़ने के लिए सदैव प्रेरित और सहयोग किया।

इस अवसर पर वन मंत्री संजय शर्मा, सांसद चुन्नीलाल गरासिया, विधायक ताराचंद जैन, फूलसिंह मीणा, पूर्व विधायक धर्मनारायण जोशी, राजस्थान के राज्यपाल के सलाहकार प्रो. के.सी. सोडानी, भाजपा शहर जिलाध्यक्ष गजपालसिंह राठौड़, भाजपा देहात जिलाध्यक्ष पुष्कर तेली, सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक प्रमोद सामर, पूर्व जिलाध्यक्ष दिनेश भट्ट, चन्द्रगुप्त सिंह चौहान, पूर्व महापौर रजनी डांगी, पूर्व उपमहापौर लोकेश द्विवेदी, पारस सिंघवी, वरिष्ठ नेता दुल्हेसिंह सारंगदेवोत, दिग्विजय श्रीमाली, प्रकाश अग्रवाल, दिलीपसिंह राठौड़, डॉ. विजय विप्लवी, मनोहर चौधरी, घनश्याम चावला, महेश भावसार तथा शहर जिला प्रवक्ता गोविन्द दीक्षित भी उपस्थित रहे।

राजस्थान विद्यापीठ के कुलपति डॉ. शिवसिंह सारंगदेवोत ने भी राज्यपाल ओमप्रकाश माथुर का स्वागत किया।

यह मुलाकात केवल औपचारिक शिष्टाचार तक सीमित नहीं रही, बल्कि जनसंघ से भाजपा तक के राजनीतिक सफर, आपातकालीन संघर्षों और संगठनात्मक विरासत को याद करने का महत्वपूर्ण अवसर बनी, जिसने पुराने साथियों के बीच दशकों पुराने संबंधों को एक बार फिर जीवंत कर दिया।

Pratahkal Bureau

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