ओबीसी आरक्षण पर कामिनी गुर्जर के तीखे सवाल, आयोग की पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की उठाई मांग
उदयपुर में कामिनी गुर्जर ने ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग की रिपोर्ट और 21 प्रतिशत आरक्षण पर सवाल उठाते हुए सरकार से पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की।

अखिल भारतीय कांग्रेस ओबीसी विभाग की महिला एग्जीक्यूटिव कमेटी की सदस्य कामिनी गुर्जर ने निकाय एवं पंचायत चुनावों के लिए ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग की रिपोर्ट के आधार पर तय किए गए आरक्षण पर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार से आयोग की पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक करने और राजनीतिक रूप से वंचित ओबीसी वर्गों को वास्तविक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की मांग की है।
कामिनी गुर्जर ने कहा कि यदि निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण अंततः 21 प्रतिशत ही रखना था, तो आयोग के गठन, प्रदेश के लगभग 76 लाख परिवारों के सर्वे और पूरी प्रक्रिया पर करोड़ों रुपये खर्च करने का औचित्य राज्य सरकार को स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ओबीसी वर्ग को पहले से ही 21 प्रतिशत आरक्षण मिल रहा था। ऐसे में आयोग के गठन, व्यापक सर्वे और लंबे अध्ययन के बाद भी यदि आरक्षण प्रतिशत में कोई बदलाव नहीं हुआ, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि ओबीसी समाज को इससे वास्तविक रूप से क्या लाभ मिला।
उन्होंने कहा कि आयोग का उद्देश्य केवल आरक्षण का प्रतिशत निर्धारित करना नहीं था, बल्कि राजनीतिक रूप से वंचित ओबीसी जातियों को स्थानीय निकायों एवं पंचायतों में न्यायसंगत प्रतिनिधित्व दिलाना भी था। उनका कहना था कि यदि लंबे अध्ययन और व्यापक सर्वे के बावजूद पहले से लागू व्यवस्था में कोई परिवर्तन नहीं हुआ, तो आयोग की सिफारिशों के प्रभाव को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
कामिनी गुर्जर ने आयोग के उपलब्ध आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश में ओबीसी आबादी लगभग 3.80 करोड़ बताई गई है। इसके बावजूद जयपुर नगर निगम के 148 वार्डों में केवल 31, जबकि जोधपुर और कोटा नगर निगम के 100-100 वार्डों में मात्र 21-21 वार्ड ही ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे में यह प्रश्न स्वाभाविक है कि आयोग की सिफारिशों के बाद भी पहले से लागू व्यवस्था में आखिर क्या परिवर्तन हुआ।
उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय का उद्देश्य केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उन ओबीसी जातियों को राजनीतिक भागीदारी दिलाना होना चाहिए जो वर्षों से प्रतिनिधित्व से वंचित रही हैं। यदि आयोग की रिपोर्ट में ऐसे वर्गों की पहचान की गई है तो सरकार यह सार्वजनिक करे कि किन-किन जातियों को पहली बार प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है।
कामिनी गुर्जर ने राज्य सरकार से मांग की कि ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग की पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए तथा यह भी बताया जाए कि आयोग की सिफारिशों के आधार पर राजनीतिक रूप से उपेक्षित ओबीसी वर्गों को क्या ठोस लाभ मिला। उन्होंने कहा कि ओबीसी समाज की वास्तविक जनसंख्या, सामाजिक स्थिति और राजनीतिक भागीदारी को ध्यान में रखकर ही सामाजिक न्याय की भावना को सार्थक किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ओबीसी विभाग इस मुद्दे को समाज के बीच मजबूती से उठाता रहेगा और ओबीसी वर्ग के अधिकारों की लड़ाई निरंतर जारी रखेगा।

Pratahkal Bureau
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