आंध्र प्रदेश में बरामद नवजात, कुंवारी मां ने किया इनकार, आदिवासी बच्चे की तस्करी का खुलासा
उदयपुर पुलिस ने आंध्र प्रदेश से नवजात बच्चा बरामद किया, लेकिन कुंवारी मां ने इनकार किया। आदिवासी नवजात की अंतरराज्यीय तस्करी का खुलासा, महाराष्ट्र और गुजरात के गिरोह से जुड़े आरोपी गिरफ्तार। जांच अभी भी जारी, असली बच्चा कहाँ है यह सवाल बना हुआ है।

उदयपुर। जिले के मांडवा थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक अंतरराज्यीय नवजात तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए आंध्र प्रदेश से एक दूधमुंहे बच्चे को बरामद किया। लेकिन जन्म देने वाली कुंवारी मां ने इस बच्चे को अपना पुत्र मानने से इंकार कर दिया, जिससे यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि बरामद बच्चा किसका है और वास्तविक आदिवासी नवजात कहाँ है।
मांडवा थानाधिकारी प्रवीण सिंह के नेतृत्व में हुई कार्रवाई में पता चला कि महाराष्ट्र के ठाणे निवासी डॉ. सचिन देव ने नवजात बच्चे को 4.80 लाख रुपये में जैन परिवार को बेच दिया था, जो बच्चे को लेकर आंध्र प्रदेश चले गए। जब बच्चे को कुंवारी मां के सामने पेश किया गया, तो उसने कहा कि यह बच्चा उसका नहीं है और उसने नाभि पर बीड़ी के दो दाग होने की तस्वीरें मोबाइल में दिखाई। पुलिस ने तस्वीरों की जांच की और पुष्टि की कि बरामद बच्चा आदिवासी किशोरी का नहीं था। फिलहाल बच्चे को सीडब्ल्यूसी के समक्ष पेश कर बाल गृह भेज दिया गया।
पुलिस ने लगातार पूछताछ और जांच के बाद आदिवासी बच्चे की तस्करी का पूरा नेटवर्क उजागर किया। आरोपी मुकेश ने बच्चे को डेढ़ लाख रुपये में गुजरात के दलपत भाई को बेच दिया, जिसने इसे महाराष्ट्र के शीतल राहुल काकड़े को 2.30 लाख रुपये में बेचा। शीतल ने बच्चे को डॉ. सचिन देव को 2.70 लाख रुपये में ट्रांसफर किया, जो आगे जैन परिवार को 4.80 लाख रुपये में पहुंचा।
जांच में यह भी सामने आया कि नवजात बच्चा ओगणा थाना क्षेत्र की 15 वर्षीय नाबालिग किशोरी का था, जिसे नवम्बर 2024 में सरदीराम ने चाकू की नोक पर दुष्कर्म कर गर्भवती बनाया था। 11 अगस्त, 2025 को किशोरी ने गुजरात के हिम्मतनगर सिविल हॉस्पिटल में डिलेवरी कराई। 13 अगस्त को आरोपी मुकेश, उसकी पत्नी सुमि और अन्य लोग घर में घुसकर नवजात बच्चे को छीन ले गए। इस मामले में मांडवा थानाधिकारी की कार्यवाही न करने पर उन्हें जिला पुलिस अधीक्षक ने निलंबित कर दिया था।
डिप्टी डूंगर सिंह चुण्डावत ने पोक्सो-1 कोर्ट में प्रार्थना पत्र पेश कर तीनों मुख्य आरोपियों से केन्द्रीय कारागृह में पूछताछ की स्वीकृति मांगी, जिसे पीठासीन अधिकारी ने मंजूर कर लिया। पुलिस अब उस आदिवासी नवजात बच्चे तक पहुँचने और तस्करी में शामिल सभी आरोपियों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए जांच जारी रखी है।
यह मामला न केवल अंतरराज्यीय मानव तस्करी की गंभीरता को उजागर करता है, बल्कि यह सामाजिक सुरक्षा और नाबालिगों की सुरक्षा के महत्व पर भी सवाल खड़ा करता है।
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Pratahkal Bureau
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