उदयपुर और सलूम्बर में जनजाति उत्थान की नई पहल: पशुपालकों को मिलेंगे नि:शुल्क बकरी और मुर्गी ईकाइयां
उदयपुर और सलूम्बर के जनजाति पशुपालकों के लिए सरकार ने जनजाति कल्याण कोष योजना 2025-26 के तहत नि:शुल्क बकरी और मुर्गी ईकाई वितरण हेतु आवेदन आमंत्रित किए हैं। संयुक्त निदेशक डॉ. सुरेश कुमार जैन के नेतृत्व में संचालित इस योजना का उद्देश्य 18 ब्लॉकों के पात्र परिवारों का आर्थिक उन्नयन करना है। प्राथमिकता के आधार पर होने वाले इस चयन से क्षेत्र में स्वरोजगार और समृद्धि के नए द्वार खुलेंगे।

उदयपुर। जनजाति समाज के पशुपालकों को आर्थिक संबल प्रदान करने और उन्हें आत्मनिर्भरता की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जनजाति कल्याण कोष (टीएडी) योजना वर्ष 2025-26 के अंतर्गत उदयपुर और सलूम्बर जिलों के 18 ब्लॉकों में रहने वाले पशुपालकों के लिए स्वर्णिम अवसर की घोषणा की गई है। इस महत्वाकांक्षी योजना के माध्यम से क्षेत्र के पात्र परिवारों को नि:शुल्क मुर्गी ईकाई और बकरी यूनिट का वितरण किया जाएगा, जो न केवल उनके जीवन स्तर को ऊँचा उठाएगा बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी एक नई जान फूंकेगा। संयुक्त निदेशक डॉ. सुरेश कुमार जैन ने योजना की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि सरकार का मुख्य ध्येय चयनित गांवों का एकीकृत सामाजिक और आर्थिक विकास सुनिश्चित करना है, ताकि जनजाति समाज प्रगति की नई ऊंचाइयों को छू सके।
वितरण की रूपरेखा को स्पष्ट करते हुए डॉ. जैन ने जानकारी दी कि उदयपुर जिले में कुल 90 बकरी ईकाइयां और 815 मुर्गी ईकाइयां वितरित की जाएंगी, जबकि नवगठित सलूम्बर जिले के लिए 50 बकरी ईकाइयां और 395 मुर्गी ईकाइयां आवंटित की गई हैं। प्रत्येक मुर्गी ईकाई के तहत लाभार्थी को 50 चूजे प्रदान किए जाएंगे, वहीं बकरी यूनिट में 5 बकरियां और 1 बकरा शामिल होगा। योजना की प्रक्रिया को अत्यंत पारदर्शी और सुलभ बनाया गया है। जनजाति क्षेत्र के इच्छुक लाभार्थी आगामी 7 दिनों के भीतर अपने आवश्यक दस्तावेजों के साथ चयनित राजस्व ग्राम की निकटतम पशु चिकित्सा संस्था में आवेदन जमा करा सकते हैं। पात्रता के मानदंडों के अनुसार, आवेदन करने वाले पशुपालक की आयु 18 से 60 वर्ष के मध्य होनी चाहिए और उसका कम से कम पांचवीं कक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि लाभ वितरण में सामाजिक न्याय का पूरा ध्यान रखा जाएगा। आवेदन की प्रक्रिया में एक परिवार से केवल एक ही सदस्य को लाभान्वित किया जाएगा, भले ही उनके राशन कार्ड या जन-आधार कार्ड पृथक हों। चयन प्रक्रिया में विधवा, दिव्यांग, आर्थिक रूप से कमजोर आय वर्ग, भूमिहीन, लघु-सीमांत कृषक और महिला बकरी पालकों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। आवेदकों को यह ध्यान रखना होगा कि वे केवल एक ही श्रेणी, यानी या तो बकरी ईकाई या फिर मुर्गी ईकाई के लिए आवेदन कर सकते हैं। लाभार्थियों की अंतिम सूची का अनुमोदन संबंधित ग्राम पंचायत के सरपंच अथवा जन प्रतिनिधियों द्वारा किया जाना अनिवार्य है, जिससे स्थानीय भागीदारी और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। लाभार्थी पशुपालकों का अंतिम चयन संयुक्त निदेशक की अध्यक्षता में किया जाएगा, जिसमें उप निदेशक (पशुधन विकास), संबंधित ब्लॉक नोडल अधिकारी, पशुपालन विभाग के प्रतिनिधि और संबंधित ग्राम पंचायत के ग्राम विकास अधिकारी या प्रशासक सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे। यदि आवेदनों की संख्या निर्धारित लक्ष्य से अधिक प्राप्त होती है, तो निष्पक्षता बनाए रखने के लिए चयन लॉटरी सिस्टम के माध्यम से किया जाएगा। सरकार की यह पहल जनजाति क्षेत्रों में पशुपालन को एक लाभप्रद व्यवसाय के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी, जिससे हजारों परिवारों के आंगन में समृद्धि की नई किरण पहुंचेगी।

Pratahkal Bureau
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