आकोला। मेवाड़ क्षेत्र के आकोला और आसपास के इलाकों में मौसम के बदले मिजाज ने आमजन की दुश्वारियां बढ़ा दी हैं। बेमौसम छाए घने कोहरे और हाड़ कपा देने वाली ठंड ने समूचे क्षेत्र को अपनी आगोश में ले लिया है, जिससे सामान्य जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। सुबह की शुरुआत बादलों की ओट और धुंध की चादर के साथ हुई, जिसने दोपहर तक सूर्यदेव को दर्शन देने से रोके रखा। आलम यह है कि विजिबिलिटी घटकर मात्र दस मीटर तक रह गई है, जिससे सड़कों पर आवागमन किसी जोखिम से कम नहीं रह गया है।

बीती रात हुई ओस की बूंदाबांदी ने फिजाओं में कनकनी और बढ़ा दी है। हाड़ कंपाने वाली इस शीतलहर के कारण लोग दिन भर ऊनी वस्त्रों में लिपटे नजर आए। सड़कों पर सन्नाटा पसरा है और बाजारों की रौनक पर भी कोहरे का ग्रहण लग गया है। वाहन चालकों को दिन के उजाले में भी हेडलाइट्स का सहारा लेना पड़ रहा है, क्योंकि सामने से आने वाले वाहन घने कोहरे के कारण ओझल हो रहे हैं। यह स्थिति यातायात के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है।

इस कड़ाके की ठंड का सबसे ज्यादा असर नौनिहालों पर देखने को मिल रहा है। सुबह-सुबह स्कूल जाने वाले बच्चे ठिठुरते हुए नजर आ रहे हैं, जो अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। पारे में लगातार आ रही गिरावट और बर्फीली हवाओं के बीच लोग जगह-जगह गली-मोहल्लों में अलाव जलाकर सर्दी से बचने का जतन कर रहे हैं। प्रशासन और मौसम विभाग के अनुसार तापमान में यह गिरावट अभी जारी रह सकती है। तमाम आधुनिक सुख-सुविधाओं के बावजूद, वर्तमान परिस्थितियों में ग्रामीण अंचल के लिए अलाव ही एकमात्र सहारा साबित हो रहा है। मौसम की यह मार न केवल परिवहन बल्कि दैनिक व्यापारिक गतिविधियों को भी प्रभावित कर रही है, जिससे क्षेत्र में एक अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।

Pratahkal Bureau

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