खेरवाड़ा के ग्राम कातरवास (बावलवाड़ा) के रहने वाले किसान दंपति शिमला एवं दिनेश ने प्राकृतिक खेती को अपनाकर कम जोत के बावजूद आर्थिक आत्मनिर्भरता का एक नया मॉडल पेश किया है। सीएमएफ संस्था के तकनीकी मार्गदर्शन में इस दंपति ने मात्र 300 वर्गमीटर भूमि का उपयोग करते हुए मिर्च की खेती और पौधशाला का संचालन शुरू किया है, जो अब क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए एक सफल उदाहरण बन चुका है।

किसान दंपति की इस पौधशाला में एक साथ 10,000 उच्च गुणवत्ता वाले मिर्च के पौधे तैयार करने की क्षमता है। वैज्ञानिक पद्धति से क्यारियां तैयार कर गुणवत्तापूर्ण बीजों के माध्यम से उगाए गए ये पौधे न केवल दंपति की अपनी खेती की जरूरतें पूरी कर रहे हैं, बल्कि स्थानीय किसानों को भी स्वस्थ पौधे उपलब्ध कराने का अवसर प्रदान कर रहे हैं। इन पौधों की बेहतर वृद्धि और मजबूती सुनिश्चित करने के लिए दंपति ने जीवामृत, घनजीवामृत और नीमास्त्र जैसे प्राकृतिक आदानों का उपयोग किया है। नियमित सिंचाई, प्रभावी खरपतवार नियंत्रण और पौधों की निरंतर देखरेख ने उत्पादन को और अधिक प्रभावशाली बना दिया है।

इस प्राकृतिक कृषि मॉडल के माध्यम से शिमला और दिनेश को प्रति माह 10,000 से 12,000 रुपये की नियमित आय प्राप्त हो रही है। कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाले पौधों के उत्पादन से न केवल मुनाफे में वृद्धि हुई है, बल्कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति भी काफी सुदृढ़ हुई है। आज यह दंपति अपने क्षेत्र में जैविक खेती के प्रति किसानों को जागरूक कर रहे हैं और दूसरों को भी इसी पद्धति को अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि सीएमएफ संस्था के तकनीकी सहयोग और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सीमित संसाधनों में भी बेहतर गुणवत्ता और नियमित आय अर्जित करना संभव है।

Dinesh Kumar Jain, Kherwara(Udaipur)

Dinesh Kumar Jain, Kherwara(Udaipur)

दिनेश कुमार जैन पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी और विश्वसनीय नाम हैं। उन्होंने पिछले लगभग 8 वर्षों से प्रिंट मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय रहकर जनहित से जुड़े मुद्दों, प्रशासनिक गतिविधियों, ग्रामीण विकास, सामाजिक सरोकारों तथा स्थानीय समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है।

उन्होंने जनवरी 2020 से प्रतिष्ठित समाचार पत्र दैनिक नवज्योति में संवाददाता, खेरवाड़ा एवं नयागांव ब्लॉक (जिला उदयपुर) के रूप में कार्य करते हुए तहसील एवं ब्लॉक स्तर की खबरों को प्रभावी ढंग से पाठकों तक पहुंचाया। इससे पूर्व वे लगभग दो वर्षों तक राजस्थान पत्रिका से भी जुड़े रहे, जहां उन्होंने क्षेत्रीय पत्रकारिता में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

खेरवाड़ा, नयागांव तथा आसपास के ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों की जमीनी समस्याओं, विकास कार्यों, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि एवं सामाजिक मुद्दों पर उनकी विशेष पकड़ रही है। निष्पक्ष, तथ्यपरक और जनहित आधारित पत्रकारिता उनकी पहचान है।

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