नाथद्वारा के श्रीजी मंदिर में अधिक मास के मनोरथ, कमल झांकी में विराजे प्रभु
अधिक मास के उपलक्ष्य में श्रीजी मंदिर के गर्भगृह को शीतल कमल के पुष्पों से सजाया गया, जिसमें प्रभु श्रीजी की बाल-क्रीड़ा और विशेष झांकियों का आयोजन हुआ।

नाथद्वारा। पुष्टिमार्गीय प्रधान पीठ प्रभु श्रीजी की हवेली में अधिक मास के उपलक्ष्य में आध्यात्मिक आनंद की अविरल धारा बह रही है। तिलकायत राकेश महाराज की आज्ञा एवं युवाचार्य विशाल बावा की प्रेरणा से इन दिनों मंदिर में विभिन्न अलौकिक मनोरथों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में अधिक ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मंदिर प्रांगण अत्यंत दिव्य एवं भव्य मनोरथों का साक्षी बना, जिसका दर्शन लाभ प्राप्त कर वैष्णव जन भाव-विभोर हो उठे।
आयोजन के मुख्य आकर्षण के रूप में राजभोग दर्शन के दौरान श्रीजी प्रभु एवं लाडले लाल प्रभु को 'कमल की मंडली' में विराजित किया गया। ग्रीष्मकाल की तपन के मध्य प्रभु को शीतलता प्रदान करने के उद्देश्य से समूचे गर्भगृह को शीतल कमल के पुष्पों से सुसज्जित किया गया। प्रभु के श्रृंगार में गुलाबी मलमल का पिछौड़ा, श्रीमस्तक पर छोर वाली पाग एवं उष्णकाल के अनुकूल मोतियों के हल्के आभरण धराए गए। सायंकालीन भोग-आरती दर्शन में 'खेलत में काको गुसइया' के भाव के साथ बाल-क्रीड़ा का मनोरथ सिद्ध किया गया। इसमें प्रभु की सखाओं संग गेंद खेलने की लीला का जीवंत प्रकटीकरण किया गया, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। इस अवसर पर देश-विदेश से पधारे हजारों श्रद्धालुओं ने अनुपम झांकी के दर्शन किए और श्रीजी के जयकारों से संपूर्ण परिसर को गुंजायमान कर दिया। (फोटो कैप्शन: श्रीजी मंदिर में अधिक मास मनोरथ में दर्शन करते श्रद्धालु एवं सजाई गई झांकी। फोटो: जगदीश सोनी)
इन मनोरथों ने पुष्टिमार्गीय परंपराओं की भव्यता को एक बार पुनः सिद्ध किया है, जहाँ प्रभु की सेवा और लीलाओं के प्रति समर्पण का भाव हर श्रद्धालु के मन में भक्ति का संचार कर रहा है।

