नाथद्वारा में बिजली कटौती से आमजन परेशान, रखरखाव के नाम पर हो रही कटौती
नाथद्वारा में 5 दिनों में दूसरी बार बिजली बंद रहने से 100 से अधिक गांव प्रभावित, प्रशासनिक अधिकारी और नेताओं की चुप्पी पर उठ रहे सवाल।

नाथद्वारा। विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नाथद्वारा में भीषण गर्मी के बीच बिजली कटौती का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले दो सप्ताह से विधानसभा क्षेत्र में रखरखाव के नाम पर की जा रही अघोषित बिजली कटौती ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। राजस्थान सरकार द्वारा बिजली कटौती को लेकर कोई आधिकारिक निर्देश जारी नहीं किए जाने के बावजूद, प्रसारण निगम और अजमेर विद्युत निगम के स्थानीय अधिकारियों ने 'रखरखाव' का सहारा लेकर बिजली कटौती का नया रास्ता निकाल लिया है। इस मनमर्जी के आगे न केवल आम जनता बेहाल है, बल्कि सत्ताधारी नेताओं और उच्चाधिकारियों की चुप्पी ने भी जनता के आक्रोश को बढ़ा दिया है।
श्रीजी नगरी के निवासियों के लिए बिजली संकट का यह आलम है कि महज 5 दिनों के अंतराल में दूसरी बार बिजली की आपूर्ति साढ़े चार घंटे तक बाधित रहेगी। प्रसारण निगम के सहायक अभियंता पुनीत की सूचना पर नाथद्वारा के सहायक अभियंता द्वारा जारी किए गए आधिकारिक पत्र के अनुसार, आज शुक्रवार को निर्धारित कटौती के चलते जनजीवन प्रभावित होगा। गौरतलब है कि इससे पूर्व गत शनिवार, 16 मई को भी साढ़े चार घंटे की कटौती का फरमान जारी किया गया था, लेकिन उस दिन वास्तविकता में जनता को लगभग 7 घंटे तक बिजली से वंचित रहना पड़ा था। इस बार की कटौती की जद में नगरीय क्षेत्र के साथ-साथ करीब 20 पंचायतों के 100 से अधिक गांव भी शामिल हैं, जिससे ग्रामीण अंचलों में भी हालात खराब हैं।
आंकड़ों पर गौर करें तो उदयपुर संभाग के अन्य जिलों की तुलना में नाथद्वारा उपखंड क्षेत्र बिजली कटौती के मामले में अव्वल बन गया है। जहां प्रदेश के अन्य हिस्सों में गर्मी के मद्देनजर रखरखाव के नाम पर इतनी भारी कटौती नहीं की जा रही है, वहीं नाथद्वारा में प्रतिदिन किसी न किसी फीडर या जीएसएस के नाम पर कटौती करना विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर रहा है। विभागीय मनमर्जी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कांग्रेस पार्टी द्वारा सोमवार को स्थानीय अभियंता से मुलाकात कर सात दिनों का अल्टीमेटम देते हुए मांग पत्र सौंपा गया था, लेकिन महज तीन दिन के भीतर पुनः कटौती का आदेश जारी कर दिया गया। यह स्थिति स्पष्ट रूप से स्थानीय सत्ताधारी नेताओं की शह और विभाग की तानाशाही की ओर संकेत कर रही है। भीषण गर्मी के इस दौर में जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की यह चुप्पी आमजन के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है।

