भीलवाड़ा (प्रात:काल संवाददाता)।

सोशल मीडिया की झूठी दोस्ती ने एक मासूम की ज़िंदगी को झकझोर दिया। इंस्टाग्राम पर शुरू हुई बातचीत का अंत उस दर्दनाक घटना में हुआ, जिसमें आरोपी ने नाबालिग को बहला-फुसलाकर गोगुंदा ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। इस गंभीर अपराध के दोषी नारायण दमामी को विशिष्ट न्यायाधीश (पोक्सो एक) बालकृष्ण मिश्र की अदालत ने बुधवार को 20 वर्ष के कठोर कारावास और 59 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया।

विशिष्ट लोक अभियोजक धर्मेंद्रसिंह कानावत ने बताया कि यह मामला फूलियाकलां थाना क्षेत्र का है। 31 जुलाई 2024 को एक परिवादी ने रिपोर्ट दर्ज करवाई थी कि उसकी नाबालिग बेटी को नारायण दमामी बहला-फुसलाकर ले गया। आरोपी पहले उनके घर पर घोड़ी को ट्रेन करने आता था और इसी दौरान परिवार से परिचित हो गया था। उसी पहचान का फायदा उठाते हुए उसने पीड़िता से इंस्टाग्राम पर संपर्क किया और शादी का झांसा दिया।

रिपोर्ट के अनुसार, 30 जुलाई की रात को नारायण दमामी नाबालिग को अपने साथ गोगुंदा ले गया, जहां उसने किराए के मकान में उसे रखा और लगातार उसके साथ दुष्कर्म किया। पुलिस ने तलाश कर पीड़िता को बरामद किया और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। जांच के बाद आरोपी के खिलाफ अपहरण, दुष्कर्म और पोक्सो एक्ट की धाराओं में आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया गया।

ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने 14 गवाहों और 29 दस्तावेजों के माध्यम से आरोप साबित किए। अदालत ने साक्ष्यों और गवाही के आधार पर आरोपी नारायण दमामी को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही, अदालत ने उस पर 59 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

इस निर्णय ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि नाबालिगों के साथ यौन अपराध करने वालों को कानून किसी भी सूरत में बख्शता नहीं है। अदालत का यह फैसला न केवल पीड़िता को न्याय दिलाने वाला है, बल्कि समाज में बढ़ते साइबर-आधारित अपराधों के खिलाफ भी एक सशक्त चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।

Pratahkal Bureau

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