झून्थरी सोमनाथ महादेव मंदिर में नानी बाई का मायरा कथा के तीसरे दिन उमड़े श्रद्धालु
श्री सोमनाथ महादेव मंदिर में आयोजित धार्मिक अनुष्ठान के दौरान कथा वाचक तिलकेश जोशी ने भक्त नरसी मेहता की हुंडी लीला और श्यामल दास के विवाह का भावपूर्ण वर्णन किया।

झून्थरी स्थित श्री सोमनाथ महादेव मंदिर परिसर में आयोजित चार दिवसीय संगीतमय नानी बाई का मायरा कथा के तीसरे दिन बैठकर प्रसंग सुनते श्रद्धालु।
झून्थरी ग्राम स्थित श्री सोमनाथ महादेव मंदिर में आयोजित चार दिवसीय संगीतमय "नानी बाई का मायरा" कथा के तृतीय दिवस पर भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक भावनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा पांडाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भक्त शिरोमणि नरसी मेहता के जीवन से जुड़े प्रेरणादायक प्रसंगों का रसपान कर भाव-विभोर हो उठे।
कथा आयोजन समिति के अध्यक्ष एवं श्री सोमनाथ महादेव मंदिर के मुख्य पुजारी ओमप्रकाश मेहता ने बताया कि कथा वाचक तिलकेश जोशी ने भक्त शिरोमणि नरसी मेहता के जीवन चरित्र का विस्तारपूर्वक वर्णन करते हुए उनके जीवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रसंगों को श्रद्धालुओं के समक्ष प्रस्तुत किया।
कथा के दौरान नरसी मेहता के पुत्र श्यामल दास के विवाह प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया गया। इस अवसर पर बताया गया कि किस प्रकार भगवान ठाकुरजी की असीम कृपा और आशीर्वाद से विवाह का शुभ कार्य संपन्न हुआ तथा भक्त के प्रति भगवान की करुणा और संरक्षण का दिव्य स्वरूप प्रकट हुआ।
इसके पश्चात नरसी महाराज के पिता के श्राद्ध प्रसंग का वर्णन करते हुए भगवान श्रीकृष्ण की भक्तवत्सलता और अपने भक्तों के प्रति उनकी अटूट कृपा का मार्मिक चित्रण किया गया। कथा के इन प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भक्ति और विश्वास के भाव से ओत-प्रोत कर दिया।
तृतीय दिवस के प्रमुख आकर्षणों में नरसी जी की प्रसिद्ध हुंडी लीला का वर्णन भी शामिल रहा। कथा में बताया गया कि किस प्रकार नरसी मेहता की अटूट श्रद्धा और भगवान श्रीकृष्ण पर अडिग विश्वास के कारण स्वयं प्रभु ने अपने भक्त की लाज रखी। इस प्रसंग के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति, समर्पण और ईश्वर पर पूर्ण विश्वास का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान व्यास पीठ का पूजन एवं स्वागत हरेश जोशी द्वारा किया गया, जबकि पूजन आचार्य श्री भगवतीलाल व्यास शास्त्री के सान्निध्य में संपन्न हुआ। प्रतिदिन रात्रि 8 बजे से 10 बजे तक आयोजित हो रही कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं। ग्राम झून्थरी के सहयोग से आयोजित यह धार्मिक आयोजन क्षेत्र में आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक परंपराओं को सुदृढ़ करने का माध्यम बन रहा है।
कथा के तृतीय दिवस पर प्रस्तुत प्रसंगों ने श्रद्धालुओं के मन में भक्ति, विश्वास और समर्पण की भावना को और अधिक प्रगाढ़ किया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय रंग में रंगा नजर आया।

Pratahkal Bureau
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