खेरवाड़ा। नागफणी कॉलेज, खेरवाड़ा द्वारा संचालित पखवाड़ा-भर चलाए गए पशु चिकित्सा शिविरों ने क्षेत्र के सैकड़ों पशुपालकों के लिए बड़ी राहत साबित की। कॉलेज निदेशक डॉ. शालीन जैन के निर्देशन में आयोजित इन शिविरों का उद्देश्य गौसेवा के साथ पशुओं की स्वास्थ्य सुरक्षा और पशुपालकों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाना रहा।

डॉ. जैन ने बताया कि शिविरों में पशुओं का उपचार, टीकाकरण एवं डिवार्मिंग का कार्य वैज्ञानिक पद्धति से किया गया, ताकि क्षेत्र में पशु रोगों की रोकथाम सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि स्वस्थ पशुधन न केवल ग्रामीण आजीविका की रीढ़ है, बल्कि किसानों की आर्थिक उन्नति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जसवंत सिंह अहाडा ने बताया कि पशुपालन संस्थान के सभी अधिकारी, कर्मचारी और विद्यार्थियों ने सक्रिय भूमिका निभाते हुए चिकित्सा कार्यों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त किया। इससे प्रशिक्षणार्थियों की तकनीकी दक्षता, कौशल विकास और चिकित्सा कार्यों की समझ में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

उन्होंने बताया कि श्रीराम गौशाला खेरवाड़ा, गामड़ी देवल, करनाऊवा और पालवड़ा सहित चार स्थानों पर आयोजित शिविरों में अब तक 457 पशुओं का उपचार किया गया है, जिससे 82 पशुपालक सीधे तौर पर लाभान्वित हुए हैं। इन शिविरों से पशुपालकों में जागरूकता बढ़ी है और पशुधन स्वास्थ्य को लेकर नई उम्मीद जगी है।

इन प्रयासों ने न केवल ग्रामीण पशुधन को संबल दिया है, बल्कि कॉलेज की सामाजिक जिम्मेदारी और क्षेत्रीय विकास के प्रति प्रतिबद्धता को भी दृढ़ता से स्थापित किया है।

Pratahkal Bureau

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