लावासरदारगढ़ (प्रात:काल संवाददाता)। राज्य सरकार द्वारा स्वरोजगार और पशुपालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न ऋण, सब्सिडी और लाभकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं, किंतु सूचनाओं के अभाव में आज भी पात्र व्यक्ति इन सुविधाओं से वंचित हैं। इसके उलट, सरदारगढ़ कस्बे के एक उद्यमी ने सरकारी सहायता की प्रतीक्षा किए बिना अपने पुरुषार्थ से सफलता की एक नई इबारत लिख दी है। कस्बा निवासी मुकेश कल्याणा ने वर्ष 2019 में अपने लक्ष्मी कृषि फार्म हाउस पर मात्र 5 अमेरिकन प्रजाति के सूअरों के साथ इस व्यवसाय की नींव रखी थी। आज उनकी अटूट मेहनत और वैज्ञानिक देखरेख का ही परिणाम है कि उनके फार्म पर 650 वयस्क सूअर और 200 बच्चे मौजूद हैं, जिनमें अमेरिकन, देसी और लर जब्बर जैसी उन्नत प्रजातियां शामिल हैं।

करीब 18 बीघा विस्तृत क्षेत्र में फैले इस फार्म हाउस के संचालन के लिए मुकेश कल्याणा और उनका परिवार—सीमा, रानी, प्रेरणा, अक्षु और छोटू—दिन-रात श्रम करते हैं। पशुओं के आहार प्रबंधन पर विशेष ध्यान देते हुए उन्हें सुबह-शाम मक्की दलिया, गेहूं, आलू, सब्जियां और होटलों का वेस्ट फूड दिया जाता है। आहार की पूर्ति हेतु सप्ताह में एक बार कुंभलगढ़ के होटलों से करीब 5 टन बचा हुआ भोजन लाया जाता है, जो दो दिन के आहार के रूप में प्रयुक्त होता है। सूअरों के दाने-पानी पर प्रतिदिन औसतन 4 हजार रुपए का व्यय होता है। ग्रीष्म ऋतु में पशुओं को शीतलता प्रदान करने हेतु फार्म में 100 से अधिक अंग्रेजी बबूल के पेड़ लगाए गए हैं तथा जल व्यवस्था के लिए तीन विशाल कच्चे हौद निर्मित हैं, जिनमें प्रत्येक दो दिन में तीन टैंकर पानी डलवाया जाता है।

पशु स्वास्थ्य और सुरक्षा के मानकों का कड़ाई से पालन करते हुए मुकेश हर छह माह में सूअरों का नियमित टीकाकरण सुनिश्चित करते हैं। फार्म की सुरक्षा हेतु 40-40 फीट के तीन शेड बनाए गए हैं, जहाँ 40 कुत्ते तैनात हैं, जिनके खान-पान पर प्रतिदिन 5 किलो आटा और 5 किलो दूध व्यय होता है। प्रजनन चक्र के विषय में मुकेश ने बताया कि वे साल में केवल एक बार ही प्रजनन कराते हैं। यद्यपि एक बार में 8-9 बच्चे जन्म लेते हैं, किंतु कठिन परिस्थितियों के कारण उनमें से 4-5 ही जीवित रह पाते हैं। विपणन के क्षेत्र में मुकेश ने अब तक करीब 50 टन सूअर दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के बाजारों में बेचे हैं, जहाँ उन्हें 200 रुपए प्रति किलो तक का श्रेष्ठ भाव प्राप्त हुआ है।

वर्तमान में इस व्यवसाय से कल्याणा परिवार को सालाना 5 से 6 लाख रुपए की शुद्ध आय हो रही है। बिना किसी सरकारी सब्सिडी या वित्तीय सहायता के इस स्तर तक पहुँचने के बाद, अब मुकेश कल्याणा ने राज्य सरकार से गुहार लगाई है कि उन्हें उचित आर्थिक सहायता और विभागीय योजनाओं का लाभ प्रदान किया जाए। उनका मानना है कि यदि सरकार का सहयोग मिले, तो वे अपने इस पुश्तैनी व्यवसाय का और अधिक विस्तार कर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ कर सकते हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर अन्य लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित कर सकते हैं।

Pratahkal HQ

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