वैराग्य की राह पर अग्रसर: सागवाड़ा के उमंग और पंकज ने ग्रहण की दिगम्बर जैनेश्वरी मुनि दीक्षा
जयपुर के चित्रकूट नगर में आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज के सानिध्य में आयोजित भव्य जैनेश्वरी दीक्षा समारोह में सागवाड़ा के उमंग और पंकज ने वैराग्य का पथ अपनाते हुए दिगम्बर मुनि दीक्षा ग्रहण की। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में हुआ यह आयोजन आध्यात्मिकता और संयम की प्रेरणा बन गया।

सागवाड़ा (प्रातःकाल संवाददाता)। सांसारिक मोह-माया का परित्याग कर आत्मोद्धार की दिशा में कदम बढ़ाते हुए सागवाड़ा के दो बाल ब्रह्मचारी — उमंग और पंकज — ने सोमवार, 3 नवम्बर को जयपुर के सांगानेर रोड स्थित चित्रकूट नगर में आयोजित भव्य जैनेश्वरी दीक्षा समारोह में दिगम्बर मुनि दीक्षा प्राप्त की। यह ऐतिहासिक समारोह दिव्य तपस्वी आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज संसंघ के सानिध्य में संपन्न हुआ, जिसमें वागड़, मेवाड़ सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।
दीक्षा समारोह का आरंभ प्रातःकालीन बेला में हुआ, जब दोनों दिक्षार्थी समेत कुल सात साधकों को बैंड-बाजों के साथ बिंदौली के रूप में कार्यक्रम स्थल कंवर का बाग लाया गया। मंगलाष्टक चौक पूराई के पश्चात पारंपरिक केश-लोचन विधि संपन्न की गई, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक भावनाओं से ओत-प्रोत कर दिया। इसके बाद सभी दिक्षार्थियों ने जनसमुदाय के समक्ष विनम्रता से क्षमायाचना कर आचार्य सुन्दर सागर महाराज से दीक्षा ग्रहण का निवेदन किया।
वस्त्र-त्याग की विधि के बाद आचार्य श्री ने केसर से स्वस्तिक अंकन कर जैन आगमों में वर्णित पूर्ण विधि-विधान के अनुसार दीक्षा संस्कार संपन्न कराए। इसी दौरान आचार्य सुन्दर सागर महाराज ने सागवाड़ा निवासी 23 वर्षीय बाल ब्रह्मचारी उमंग को “मुनि श्रुतांश सागर” तथा ब्रह्मचारी पंकज को “मुनि सुधैर्य सागर” नाम प्रदान करने की घोषणा की। जैसे ही यह घोषणा हुई, हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ जयकारों से गूंज उठी और वातावरण “जय जयकार” की अनुगूंज से पवित्र हो गया।
दीक्षा उपरांत संयम जीवन के प्रतीक उपकरण — पिच्छिका और कमंडल — श्रद्धालुओं द्वारा बोली लगाकर प्रदान किए गए। समारोह के दौरान प्रतिष्ठाचार्य विनोद उर्फ विरल पगारिया ने दीक्षा की पूरी प्रक्रिया का संचालन किया और बताया कि इस दीक्षा समारोह ने वागड़ क्षेत्र को गौरवान्वित किया है।
समारोह में उपस्थित श्रद्धालुओं ने इस आध्यात्मिक क्षण को जीवन का अमूल्य अनुभव बताया। सागवाड़ा, डूंगरपुर, बांसवाड़ा और आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने इस अनोखे अवसर पर सहभागिता कर पुण्यार्जन किया। यह दीक्षा न केवल त्याग और वैराग्य की मिसाल बनी, बल्कि समाज में संयम, आत्मज्ञान और अहिंसा के आदर्शों को भी नई प्रेरणा प्रदान कर गई।
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Pratahkal Bureau
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