मदनगंज किशनगढ़ की महज 13 वर्षीय मिती जैन सोगानी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने ओजस्वी संबोधन से श्रद्धालुओं को देश के प्रति जिम्मेदारी और आत्ममंथन का संदेश दिया। आरके मार्बल कम्यूनिटी हॉल में आचार्य 108 विहर्ष सागर जी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य में 15 अगस्त को आयोजित कार्यक्रम में मिती ने कहा कि अंग्रेजों से आजादी पाना एक संघर्ष था, लेकिन अपने भीतर की कमियों से आजाद होना उससे भी बड़ा संघर्ष है।

उन्होंने कहा कि आज हमारे हाथों में किताबें, मोबाइल और इंटरनेट हैं तथा बोलने की आजादी भी है, लेकिन सवाल यह है कि क्या हम अपने पूर्वाग्रहों से आजाद हैं? जब हम कहते हैं कि भारत एक है तो जाति के नाम पर दूरी क्यों है? जब ईमानदारी को अपनी ताकत मानते हैं तो छोटी-सी सुविधा के लिए नियम तोड़ना गलत क्यों नहीं लगता? देश को परिवार मानते हैं तो सड़क पर कूड़ा देखकर हमारी जिम्मेदारी कहां चली जाती है?

मिती जैन सोगानी ने कहा कि शायद आजादी का अगला अध्याय हमें लिखना है। हमारी पीढ़ी के सामने तलवार लेकर कोई विदेशी शासक खड़ा नहीं है। हमारी लड़ाई अज्ञानता, असमानता, भ्रष्टाचार, नफरत और उस सोच से है, जो हमें एक-दूसरे से बांटती है। इस लड़ाई में हमारा सबसे बड़ा हथियार शिक्षा है।

उन्होंने कहा कि एक शिक्षित युवा सिर्फ अपना भविष्य नहीं बदलता, बल्कि अपने परिवार का भविष्य बदलता है, समाज की सोच बदलता है और अंततः देश की दिशा बदल सकता है। उन्होंने कहा कि हम अक्सर पूछते हैं कि देश हमारे लिए क्या कर रहा है, लेकिन अब सवाल बदलने का समय है कि मैं अपने देश के लिए क्या कर रहा हूं?

मिती ने कहा कि वह एक विद्यार्थी हैं। शायद उनके पास सत्ता नहीं है और बहुत पैसा भी नहीं है, लेकिन उनके पास चरित्र बनाने की उम्र, सपने देखने की हिम्मत और सही चुनाव करने की आजादी है। उन्होंने कहा कि भारत के करोड़ों युवा यदि अपने जीवन में ईमानदारी, मेहनत, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी को चुन लें तो भारत को महान बनने से कोई नहीं रोक सकता।

उन्होंने तिरंगे के सामने केवल ‘भारत माता की जय’ कहने का संकल्प लेने के बजाय गलत के सामने सही का साथ देने, भेदभाव के खिलाफ समानता की आवाज बनने, भ्रष्टाचार के सामने ईमानदारी चुनने और जहां देश को जरूरत हो, वहां पीछे नहीं हटने का संकल्प लेने का आह्वान किया।

मिती ने अपने संबोधन का समापन इन पंक्तियों से किया—“तिरंगा हाथ में लेना आसान है, तिरंगे की आन निभाना मुश्किल है। देश के लिए नारे लगाना आसान है, देश के लिए अपने कर्म बदलना मुश्किल है। तो आइए, इस मुश्किल को चुनते हैं और एक बेहतर भारत बनाते हैं।”

राष्ट्र गौरव पारस जैन ‘पार्श्वमणि’ कोटा ने जानकारी देते हुए बताया कि मिती जैन सोगानी कक्षा 8 में पढ़ रही हैं। वह रात्रि 9 बजे सो जाती हैं और सुबह 5 बजे उठकर पढ़ाई शुरू कर देती हैं। मिती जैन प्रशासनिक सेवा में जाना चाहती हैं। वह अपने जीवन का एक-एक मिनट बहुत कीमती मानती हैं और मोबाइल का उपयोग भी केवल पढ़ाई के लिए कुछ समय के लिए करती हैं।

मिती जैन सोगानी देव शास्त्र गुरु के परम भक्त श्री महेन्द्र कुमार जैन एवं मंजुला जैन (रिटायर्ड बैंक ऑफ बड़ौदा) की सुपौत्री हैं। उनके पिताजी उत्कर्ष जैन एवं अंजना जैन व्यवसायी हैं। उनकी बड़ी बहन तिथि जैन हैं।

कार्यक्रम में मुनिसुव्रत दिगंबर जैन पंचायत किशनगढ़ के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश बैद, उपाध्यक्ष मांगीलाल झांझरी, मंत्री प्रदीप गंगवाल और पूर्व अध्यक्ष विनोद जी पाटनी उपस्थित थे। आयोजन का सफल संचालन बसंत बैद ने किया।

मिती के संबोधन में स्वतंत्रता को केवल अधिकार नहीं, बल्कि जिम्मेदारी के रूप में देखने का संदेश प्रमुखता से सामने आया। उनके विचारों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को अपने व्यक्तिगत आचरण और राष्ट्र के प्रति दायित्व पर विचार करने के लिए प्रेरित किया।

Pratahkal Newsroom

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