शौर्य और स्वाभिमान के प्रतीक शिरोमणि महाराणा प्रताप की आगामी जयंती को ऐतिहासिक भव्यता प्रदान करने हेतु मेवाड़ का क्षत्रिय समाज लामबंद हो गया है। शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026 को महाराणा प्रताप क्षत्रिय समाज संस्थान के तत्वावधान में आवरी माताजी मंदिर प्रांगण स्थित श्री राजपूत धर्मशाला में एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई, जिसमें आगामी 17 जून को आयोजित होने वाले जन्मोत्सव की रूपरेखा निर्धारित की गई। कार्यक्रम के दौरान संगठन की शक्ति का प्रदर्शन करते हुए मेवाड़ क्षत्रिय महासभा मावली के नवनियुक्त अध्यक्ष भोम सिंह चुण्डावत (खेड़ी) एवं उनकी संपूर्ण कार्यकारिणी का ऊपरना ओढ़ाकर भावभीनी स्वागत व अभिनंदन किया गया। उपस्थित समाजजनों ने नवागत पदाधिकारियों को बधाई देते हुए समाज के उत्थान और संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाने का संकल्प दोहराया।

बैठक की गंभीरता को स्वर देते हुए क्षत्रिय युवक संघ के संभाग प्रमुख भंवर सिंह बेमला ने युवाओं के चरित्र निर्माण पर विशेष बल दिया। उन्होंने 14 जून से 17 जून तक फतहनगर स्थित ‘द स्कॉलर्स गुरूकुल स्कूल’ में आयोजित होने वाले चार दिवसीय संस्कार शिविर की विस्तृत जानकारी साझा की और आह्वान किया कि समाज के सर्वांगीण विकास हेतु युवा शक्ति की अधिकतम सहभागिता अनिवार्य है। इस वैचारिक मंथन और स्वागत समारोह के दौरान संस्थान अध्यक्ष फतह सिंह राणावत (बंगला), महामंत्री रायसिंह चुण्डावत (खेड़ी), उपाध्यक्ष भैरू सिंह चौहान (मानखण्ड), करणी सेना जिला संयोजक भगवत सिंह (सनवाड़) तथा पूर्व महामंत्री महेंद्र सिंह झाला ने अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई।

इस गरिमामयी अवसर पर भंवर सिंह झाला (बोयणा), मोती सिंह झाला (मावली), कुलदीप सिंह (बासनी कंला), कैलाश सिंह चौहान (थामला), किशोर सिंह झाला (बोयणा), फतह सिंह राठौड़ (सादड़ी), नारायण सिंह चौहान, अशोक सिंह राणावत, शक्ति सिंह राणावत, किशन सिंह सोलंकी, बादल देव सिंह राणावत, शक्ति सिंह चुण्डावत, करण सिंह सिसोदिया, भगवत सिंह गौड़, सुल्तान सिंह चुण्डावत, पप्पू सिंह चुण्डावत (खेड़ी), अभय सिंह चुण्डावत, राम सिंह चुण्डावत, डूंगर सिंह राणावत, देवराज सिंह चुण्डावत, भगवत सिंह राणावत, गोवर्धन सिंह राणावत, पूरण सिंह राणावत, लालनाथ चौहान (टिलोरा), जीवन सिंह चौहान (मानखण्ड), सुल्तान सिंह (बांसलिया), किशोर सिंह चुण्डावत (साकरिया खेड़ी), फतह सिंह चौहान (पिपरोली) एवं दशरथ सिंह सहित मेवाड़ क्षेत्र के अनेक गणमान्य समाजजन साक्षी रहे। समाज के इस सामूहिक प्रयास और सुदृढ़ नियोजन ने महाराणा प्रताप जयंती को मावली और फतहनगर क्षेत्र में एक बड़े सांस्कृतिक उत्सव के रूप में स्थापित करने की नींव रख दी है।

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