उदयपुर के नूरड़ा में एडीएम कोर्ट ने विवादित आवासीय पट्टा निरस्त किया। एसडीएम ने रास्ता खुलवाने और आदेश की पालना कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए।

उदयपुर जिले की पंचायत समिति मावली के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत नूरड़ा में कथित नियमों की अनदेखी कर जारी किए गए एक आवासीय पट्टे को अतिरिक्त जिला कलक्टर (एडीएम) न्यायालय ने निरस्त कर दिया है। न्यायालय ने माना कि पहले से आवंटित भूमि पर दोबारा पट्टा जारी किया गया और आवागमन के रास्ते को भी उसमें शामिल कर लिया गया। इसके बाद उपखण्ड अधिकारी (एसडीएम) मावली ने विकास अधिकारी को न्यायालय के आदेश की कड़ाई से पालना सुनिश्चित करते हुए रास्ता खुलवाने के निर्देश जारी किए हैं।

मामला नूरड़ा निवासी प्रार्थी प्रकाश चन्द्र मेहता पुत्र राम नारायण मेहता द्वारा दायर निगरानी याचिका (प्रकरण संख्या 04/2025) से जुड़ा है। याचिका में बताया गया कि विपक्षी रमेशचन्द्र मेहता पुत्र सोहनलाल मेहता के पास ग्राम पंचायत द्वारा 15 मार्च 1986 को जारी 42×40 फीट नाप और कुल 1680 वर्गफीट क्षेत्रफल का पट्टा पहले से मौजूद था। इसके बावजूद वर्ष 2017 में ग्राम पंचायत के साथ कथित मिलीभगत कर उसी भूमि पर पट्टा संख्या 52358 के रूप में 49×38 फीट नाप और कुल 1862 वर्गफीट क्षेत्रफल का नया पट्टा जारी कर दिया गया।

याचिका के अनुसार, नए पट्टे में प्रार्थी प्रकाश चन्द्र मेहता के बाड़े तक आने-जाने वाले वर्षों पुराने 15 फीट चौड़े और 55 फीट लंबे निजी रास्ते को भी शामिल कर लिया गया। इसके बाद विपक्षी ने उस स्थान पर ट्रैक्टर खड़ा कर प्रार्थी के आवागमन का मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया।

मामले की सुनवाई करते हुए अतिरिक्त जिला कलक्टर (उदयपुर) दीपेंद्र सिंह राठौड़ (आरएएस) ने अपने निर्णय में कहा कि एक ही भूमि का पहले से पट्टा होने के बावजूद उसी भूमि का अधिक क्षेत्रफल के साथ दोबारा पट्टा जारी किया जाना दुर्भावनापूर्ण है और इससे रास्ते की भूमि को अपने कब्जे में लेने की मंशा स्पष्ट होती है। न्यायालय ने यह भी माना कि आवागमन के रास्ते पर पट्टा जारी करना ग्राम पंचायत की गंभीर विधिक त्रुटि है।

अतिरिक्त जिला कलक्टर न्यायालय ने राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 97 के तहत कार्रवाई करते हुए ग्राम पंचायत नूरड़ा द्वारा 30 जून 2017 को जारी विवादित पट्टे को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने का आदेश दिया।

न्यायालय के आदेश के बावजूद मौके से अवरोध नहीं हटाए जाने पर प्रार्थी प्रकाश चन्द्र मेहता ने मावली उपखण्ड अधिकारी की जनसुनवाई में न्याय की गुहार लगाई। मामले को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम मावली रमेश सीरवी पुनाडिया (आरएएस) ने पंचायत समिति मावली के विकास अधिकारी को आधिकारिक पत्र जारी कर निर्देश दिए कि एडीएम न्यायालय के आदेश की कड़ाई से पालना सुनिश्चित की जाए।

एसडीएम ने विकास अधिकारी को निर्देशित किया कि परिवाद का नियमानुसार त्वरित निस्तारण कराया जाए, प्रार्थी के आने-जाने का मार्ग खुलवाया जाए तथा की गई कार्रवाई की रिपोर्ट अविलंब अधोहस्ताक्षरकर्ता यानी एसडीएम कार्यालय को भेजी जाए। इस आदेश के साथ अब मामले में न्यायालय के निर्णय के क्रियान्वयन और रास्ता बहाल कराने की प्रशासनिक कार्रवाई पर निगाहें टिकी हैं।

Pratahkal Bureau

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